गोंडा। बेसिक शिक्षा के आठ हजार शिक्षकों व कर्मियों की उम्मीद को झटका लगा है। पांच करोड़ के करीब का भुगतान फंसा हुआ है। जनवरी माह में डीए यानि महंगाई भत्ता बढ़ोत्तरी तय होनी थी। पांच माह बीतने के बाद भी शिक्षक व कर्मी इंतजार कर रहे हैं, इसमें शिक्षकों के साथ ही पेंशनर शिक्षकों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक तो पांच माह का डीए (महंगाई भत्ता) इकठ्ठठा हो गया है। डीए (महंगाई भत्ता) न जुड़ने से शिक्षकों व कर्मियों को हर महीने वेतन भी कम मिल रहा है। विभाग में कई बार मांग हुई, लेकिन शासन के एक आदेश का इंतजार हो रहा है। इससे अभी तक वेतन में डीए (महंगाई भत्ता) नहीं जोड़ा गया है।
शासन की ओर से डीए (महंगाई भत्ता) देने का ऐलान जनवरी माह में हो चुका है। अभी तक भुगतान न होना चौंकाने वाला है। जिले में शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मियों को इससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं उनके वेतन में भी बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। शिक्षक नेता विनय तिवारी कहते हैं कि समय से डीए (महंगाई भत्ता) न बढ़ने से शिक्षकों को अवशेष भुगतान के लिए दफ्तरों का चक्कर लगाना होगा। जनवरी से अब तक आदेश न आना समझ से परे है। विभाग की तरफ से भी कोई प्रक्रिया नहीं की जा रही है। जनवरी से अब तक का भुगतान जोड़ा जाए तो पांच करोड़ से अधिक का भुगतान फंसा हुआ है।
बताया कि एक- दो महीने अगर और लगेंगे तो यह धनराशि बढ़ जाएगी। इसके बाद जब डीए बढ़ेगा तो अवशेष के भुगतान के लिए विभाग में माथा पच्ची करनी होगी। वित्त एवं लेखाधिकारी मंगलेश पालीवाल कहते हैं कि शासन डीए के लिए आदेश और बजट दोनों आना है। अभी जो भी बजट है, वह नियमित वेतन के लिए ही है। उम्मीद जताई कि जल्द ही आदेश आएगा। संवाद
सदन में उठा चुका वेतन विसंगति व पदोन्नति का मामला
जिले में एक हजार से अधिक शिक्षक वेतन विसंगति का दंश झेल रहे हैं। बीते दिनों जिले में आए शिक्षक एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने शिक्षकों से संवाद किया था। इसकी जानकरी शिक्षक नेता विनय तिवारी ने दी। उन्होंने सदन में मामले का उठाया। अधिकारियों को निर्देश आए हैं। कई शिक्षक एक ही वर्ष के होते हुए भी वेतन कम पा रहे हैं। अंतरजनपदीय स्थानांतरण से पदोन्नति लेकर आए कई शिक्षकों को जिले में डीए व इंक्रीमेंट मिलता रहा। जिससे उनका वेतन यहां ही ड्यूटी कर रहे शिक्षकों से अधिक हो गया है। वह शिक्षक भी वेतन के समानता की मांग कर रहे हैं। वहीं जिले में बीते छह सालों से पदोन्नति नहीं हुई है। इन मामलों को शिक्षक एमएलसी ने सदन में भी उठाया है।
चार करोड़ से अधिक का वेतन दबाए हैं 56 फर्जी शिक्षक
जिले के 56 शिक्षक ऐसे हैं, जो चार करोड़ से अधिक का वेतन लेकर फरार हैं। बीते सालों में दूसरों के अभिलेख पर नौकरी करने या फर्जीवाड़ा करने वाले 56 शिक्षक सेवा से बर्खास्त किए गए हैं। उनसे रिकवरी के लिए विभाग ने पत्र भी भेजा है। इसके बाद भी अभी तक फर्जी शिक्षकों ने गलत तरीके से प्राप्त किए वेतन जमा नहीं किया है। चार करोड़ से अधिक की धनराशि राजकोष में जमा कराई जानी है। कई प्रयासों के बाद भी रिकवरी नहीं हो पा रही है। अब विभाग राजस्व विभाग को रिकवरी के लिए प्रकरण भेजने की तैयारी में है।
शिक्षकों के महंगाई भत्ता बढ़ोत्तरी व पदोन्नति की कार्रवाई शासन के आदेश पर ही होगा। इसका इंतजार हो रहा है, आदेश मिलते ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। फर्जीवाड़े के शिक्षकों से रिकवरी के लिए राजस्व विभाग को भेजा जाएगा। डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए