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घर पहुंचे दो छात्र, अपनों से मिलकर हुए निहाल

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फोटो-18-गोंडा के नवाबगंज में अपने परिवार के साथ खारकीव से वापस लौटा शिखर गुप्ता। - फोटो : GONDA
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गोंडा। रूस की यूक्रेन पर लगातार बमबारी के दौरान गोंडा के 12 से अधिक छात्र रोमानिया, पोलैंड, हंगरी बार्डर पर फंसे हैं। इनमें दो छात्र सही सलामत वतन वापसी के बाद अपने घर पहुंच गए। अपनों से मिलकर दोनों निहाल हो गए। छात्रों की माने तो यूक्रेन में पांच हजार भारतीय छात्र फंसे हैं। जिन्हें वतन वापसी का इंतजार है। जबकि यूक्रेन छोड़ चुके ऐसे नौ छात्रों जो बार्डर पर फंसे हैं। उनके परिवार के लोगों को बेटों के सही सलामत घर पहुंचने का इंतजार है।
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हंगरी बॉर्डर के एयरपोर्ट से भारत पहुंचा आकाश
यूक्रेन में रूस से चल रही जंग के बीच यूक्रेन के विनीसिया शहर में फंसे इटियाथोक ब्लॉक के मध्यनगर गांव का रहने वाला आकाश सिंह शुक्रवार की देरशाम अपने घर पहुंच गया। शहर के विष्णुपुरी कॉलोनी में रह रहे आकाश के पिता सूर्य प्रताप सिंह ने बताया कि जब तक बेटा घर नहीं पहुंचा था। उसकी चिंता बनी थी। आकाश ने बताया कि बस से विनीसिया शहर से हंगरी पहुंचा। वहां से भारतीय एंबेसी में एंट्री कराने के बाद फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा। आकाश के मुताबिक, दिल्ली से वह ट्रेन से लखनऊ पहुंचा। जहां से यूपी सरकार के अधिकारी ने कार हायर करके उसे घर पहुंचाया।
उड़नखटोला से आज सुबह दिल्ली पहुंचेगा सुयश
यूक्रेन में फंसा करनैलगंज नगर के व्यापारी रमेश कुमार गुप्ता का बेटा सुयश गुप्ता यूक्रेन के कीव शहर में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। जंग के बीच तीन दिन पहले वह कीव से निकला था। शुक्रवार को वह रोमानिया बार्डर पहुंच गया। रमेश के मुुताबिक, उनका बेटा यूक्रेन के समय अनुसार 4 बजे यानी भारतीय समय अनुसार रात में एक बजे रोमानिया से दिल्ली के लिए आने वाली फ्लाइट से वतन के लिए रवाना होगा। सुयश के पिता ने बताया कि शनिवार की सुबह 5 बजे सुयश के दिल्ली पहुंचेगा।
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टर्नोपिल से फ्लाइट से दिल्ली पहुंचा प्रभाकर पांडेय
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे परसपुर के विशुनपुर बेलभरिया का रहने वाला प्रभाकर पांडेय पुत्र वेद प्रकाश पांडेय गुरूवार को रोमानिया होते हुए टर्नोपिल पहुंचा। वहां से फ्लाइट से दिल्ली पहुंच गया। प्रभाकर के पिता वेद प्रकाश पांडेय बताते हैं। जब तक बेटा यूक्रेन में फंसा था, पूरे परिवार के लोगों को प्रभाकर की चिंता बनी थी। पीएम नरेन्द्र मोदी के प्रयास से उनके बेटे समेत तमाम भारतीय बच्चे अपने वतन को लौट आए। बच्चों की वापसी पर वेद प्रकाश ने केन्द्र व मोदी सरकार का आभार जताया है।
याद आता है यूक्रेन मिलिट्री की तनीं बंदूकों का मंजर
यूक्रेन के खारकीव में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा नवाबगंज कके कहरान मोहल्ले के रहने वाले शैलेश गुप्ता का बेटा शिखर गुरुवार की देर रात सही सलामत घर पहुंचा तो मां रमा गुप्ता व पिता शैलेश की आंखों में खुशी के आंसू बरबस छलक आए। खारकीव में जंग के बारे में शिखर बताते हैं कि सड़कों पर वाहनों के टूटे शीशे व खाली कारतूसों के खोखे चारो ओर सड़कों पर नजर आ रहे थे। जंग की शुरूआत में 06 बजे से सुबह 06 बजे तक कफ्यू लगा रहता था। इसके बाद दोपहर 03 बजे से सुबह 06 बजे तक कफ्यू बढ़ा दिया गया। बमबारी के दौरान वह सभी युनिर्वसिटी की बिल्डिंग के नीचे बने बंकर में चले जाते थे। बमबारी बंद होने के बाद जब बंकर से निकलकर बाहर आए तो अचानक सामने यूक्रेन मिलिट्री के जवान बंदूके तानकर खड़े हो गए। जिससे सभी छात्र एक बार तो दहशत में आ गए। मगर पूछताछ के बाद यूक्रेन मिलिट्री ने उन्हें यूनिर्वसिटी कैम्पस में जाने की हिदायत देकर छोड़ दिया। वो मंजर आज भी याद आता है।
खारकीव से ट्रेन से कीव, बस से पोलैंड पहुंचे शालू व प्रशांत
यूक्रेन में रूस से चल रही जंग के बीच खारकीव में फंसे मेडिकल छात्र भाई-बहन प्रशांत कुमार सोनी व शालू सोनी खारकीव में बमबारी के बीच फंसे थे। परिवार के लोगों ने अपने बच्चों की वतन वापसी के लिए केन्द्र सरकार से गुहार लगाई थी। दोनों बच्चों के पिता विनोद कुमार सोनी ने बताया कि उनका बेटा प्रशांत व बेटी शालू साथी छात्र-छात्राओं के साथ यूक्रेन के खारकीव से ट्रेन से 01 मार्च को कीवी पहुंचे थे। कीवी तक ही ट्रेन रूट होने के कारण दोनों कीवी से बस से 02 मार्च को बस से चले और 03 मार्च को पोलैंड पहुंचे। दोनों पोलैंड की एंबेसी में एंट्री कराने के बाद पोलैंड के शरणार्थी कैम्प में रखा गया है। यहां से पांच किलोमीटर की दूरी तय करके दोनों शनिवार को एयरपोर्ट पहुंचेंगे। जहां से फ्लाइट मिलने के बाद वतन के लिए रवाना होंगे।
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(संवाद)
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