गोंडा। महाराजा देवीबख्श सिंह चिकित्सा महाविद्यालय में एक करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक एलएमओ (लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन) प्लांट तैयार किया जा रहा है। इसका काम अंतिम दौर में है। संचालन के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन को लाइसेंस भी मिल गया है। मार्च के अंतिम सप्ताह तक 100 प्रतिशत शुद्ध तरल मेडिकल ऑक्सीजन बेड-टू बेड पहुंचेगी।
मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में गैस वाले ऑक्सीजन प्लांट से मरीजों को प्राण वायु मिलती है। प्लांट में खराबी आने या पाइप लाइन लीक होने से आपूर्ति ठप हो जाती है। इसके लिए शासन की ओर से एक करोड़ रुपये के एलएमओ प्लांट स्थापित करने की स्वीकृति मिली थी। जिसके फाउंडेशन व टैंक का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसके लिए लाइसेंस भी जारी हो चुका है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने ने बताया कि यह ऑक्सीजन प्लांट अत्याधुनिक तकनीक पीएसए (प्रेशर स्विंग एडसोर्प्शन) के सिद्धांत पर कार्य करेगा। जिससे अधिक से अधिक ऊंचाई पर भी ऑक्सीजन का प्रेशर कम नहीं होगा। वेंटीलेटर व अन्य बड़ी मशीनें संचालित करने में सुविधा मिलेगी। ऑक्सीजन प्लांट बनाने का काम आईनॉक्स संस्था की ओर से किया जा रहा है। इसकी क्षमता 20 किलोलीटर होगी। ऑक्सीजन प्लांट से पाइप लाइन के जरिए नई बिल्डिंग के 200 बेड जोड़े जाएंगे। प्लांट की जगह पूरी तरह फायर प्रूफ रहेगी। जिससे आग लगने का खतरा नहीं रहेगा।
100 प्रतिशत शुद्ध होती है लिक्विड ऑक्सीजन
एसीएमओ डॉ. सीके वर्मा के अनुसार गैस की अपेक्षा लिक्विड ऑक्सीजन की शुद्धता अधिक रहती है। गैस में फिल्टर की गुणवत्ता के अनुसार 96 से 97 प्रतिशत शुद्ध ऑक्सीजन होती है, जबकि लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन 100 प्रतिशत शुद्ध होती है। एलएमओ प्लांट शुरू होने से मरीजों को राहत मिलेगी।