आवास विकास कालोनी में कथा में मौजूद श्रोता। स्रोत: आयोजक
गोंडा। शिव-पार्वती का विवाह विश्वास और श्रद्धा का अद्भुत मिलन है। भगवान शिव ने अपने विवाह में उन लोगों को बराती बनाया, जो पूर्ण उपेक्षित थे। इसके माध्यम से उन्होंने समाज को संदेश दिया कि उनका प्रिय बनने के लिए उन लोगों से प्रेम करना होगा, जिन्हें वह (शिव) प्रेम करते हैं। ये बातें आवास विकास कॉलोनी में आयोजित श्रीराम कथा में शुक्रवार को प्रवाचक रमेश भाई शुक्ल ने कहीं।
उन्होंने कहा कि विष्णु और इंद्र क्रमशः ऐश्वर्य और भोग के प्रतीक हैं, इसलिए सबको प्रिय लगते हैं, जबकि शिव भयंकर स्वरूप के प्रतीक हैं और भयंकरता देखकर सामान्य मनुष्य भयभीत हो उठता है। उन्होंने ‘करालम् महाकाल कालं कृपालम्’ की व्याख्या करते हुए शिव के दो स्वरूपों ‘भयंकर और कृपालु’ का वर्णन किया। प्रवाचक ने शिव को विश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि यथार्थ को जानना ज्ञान है और उस पर टिके रहना विश्वास। यही विश्वास शिव का मूल स्वरूप है, लेकिन मानव का विश्वास अक्सर डगमगाता रहता है, जो अशांत मन की पहचान है।
रमेश भाई शुक्ल ने कहा कि रानी मैना ने बेटी को ससुराल पक्ष के छोटे-बड़े सभी सदस्यों को प्रेम व सम्मान देने और पति के प्रति पूर्ण समर्पित रहने की सीख दी। बेटी को समझाया कि परिवार की परंपराओं और मर्यादा का सम्मान करते हुए सत्य, दया, सहनशीलता और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना। घर की सुख-शांति के लिए कटु वाणी, क्रोध और तिरस्कार से दूर रहना। सुख-दुख, संकट और विपरीत परिस्थितियों में मन को शांत रखकर धैर्य से निर्णय लेना। प्रवाचक ने कहा कि यदि आज की नवविवाहित लड़कियां माता मैना के उपदेशों का कुछ अंश भी अपने जीवन में अपनाएं, तो उनका घर अधिक सुखमय और समृद्ध हो सकता है। कार्यक्रम में घनश्याम त्रिपाठी, विश्राम वर्मा, राहुल उपाध्याय, अरविंद श्रीवास्तव, किसलय तिवारी, राजू ओझा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
आवास विकास कालोनी में कथा में मौजूद श्रोता। स्रोत: आयोजक