गोंडा। जिले में यूपी सिडको की ओर से बनाए गए 169 स्कूल भवनों में खामियों के बावजूद प्रधानाध्यापकों को हैंडओवर करा दिया गया। खामियां उजागर होने पर भी अधिकारियों ने जांच व कार्रवाई की जरूरत नहीं समझी। यह खेल लंबे समय से चलता आ रहा है। गरीब बच्चों की सुविधाओं के नाम पर जमकर बंदरबांट किया गया। ऐसे में अब बच्चों को भटकना पड़ रहा है।
सरकारी कागजों में स्कूल भवन की उम्र करीब 70 साल मानी जा रही है। आजादी के कुछ वर्षों बाद बने कुछ स्कूलों ने इस उम्र को पार भी किया। मगर पिछले कुछ वर्षों में बनाए गए स्कूल भवन नौ से 15 वर्ष की आयु ही पूरी कर पाए। आरोप है कि बिल्डिंग गिरने के खतरे के चलते जिम्मेदार कार्रवाई से बचने के लिए बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने के लिए न तो दूरी देख रहे हैं और न ही सरकार के मानकों का पालन कर रहे हैं।
बिना यातायात सुरक्षा प्रबंध के ही छोटे-छोटे बच्चों को दूर के स्कूलों में जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ऐसे में तमाम अभिभावक अपने बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला करा रहे हैं। वहीं, अव्यवस्था व कुप्रबंधन के चलते लगातार परिषदीय विद्यालय में बच्चों की संख्या घटती जा रही है। जिम्मेदार खुद को बचाने के लिए जांच व रिकवरी के बिना ही जर्जर विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण की तैयारी कर रहे हैं। बीएसए की ओर से 384 स्कूलों की नीलामी व ध्वस्तीकरण के लिए पत्रावली भेजी गई है।
1954 में बना था स्कूल, अब होगा ध्वस्त
बेलसर के सिधौटी प्राथमिक विद्यालय जबरनगर विद्यालय भवन आजादी के बाद वर्ष 1954 में बनाया गया था। करीब 70 साल बाद स्कूल भवन को जर्जर घोषित किया गया है। बेलसर ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इतने समय में बगल में नए विद्यालय भवन का निर्माण हो चुका है। ऐसे में ध्वस्तीकरण से बच्चों को कोई असुविधा नहीं होगी।
13 साल में ही विद्यालय भवन जर्जर
बेलसर के प्राथमिक विद्यालय डरौलीडीह पूरे पंडित पुरवा विद्यालय के बच्चों की सुविधा के लिए वर्ष 2011-12 में विद्यालय भवन का निर्माण किया गया। मगर विद्यालय भवन 13 साल में ध्वस्तीकरण की सूची में शामिल हो गया। शिक्षक नेता राजेश शुक्ल ने बताया कि सुविधा व कम नामांकन को देखते हुए संबंधित विद्यालय को पूरेगैन जफरापुर में विलय किया गया है।
नौ साल में ही रसोईघर जर्जर, जोखिम
मुजेहना के उज्जैनीकला प्राथमिक विद्यालय छिटईपुरवा बड़की में रसोईघर वर्ष 2013 में बनाया गया। बिल्डिंग की मानक उम्र 70 साल है। मगर नौ साल में ही जर्जर हो गई। बुधवार को जर्जर भवन में ही जान जोखिम में डालकर रसोइया मध्याह्न भोजन बनाती नजर आईं। इंचार्ज प्रधानाध्यापक अभय वर्मा ने बताया कि यहां 90 बच्चे पंजीकृत हैं। भोजन बनाने के लिए अन्य कोई उपयुक्त जगह नहीं है।
गंभीर विषय है, होगी कार्रवाई
मामला गंभीर है। इस तरह के मामले में बीएसए को निर्माण प्रभारियों से सरकारी धन की रिकवरी के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। बीएसए से रिपोर्ट तलब की जा रही है। कार्रवाई की जाएगी।
रामसागरपति त्रिपाठी, एडी बेसिक