गोंडा। परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया है। अभी तक अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाएं होती थीं लेकिन अब हर तीसरे महीने परीक्षाएं होंगी। विभाग विद्यालयों में जुलाई के अंत में तिमाही परीक्षा कराने की तैयारी कर रहा है। सरकारी स्कूलों में तिमाही परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इन परीक्षाओं से छात्रों में प्रतिस्पर्धा कि भावना पैदा होगी।
जिले के 2611 परिषदीय स्कूलों में चार लाख 70 हजार छात्रों को अब साल में चार बार परीक्षा देनी होगी। विभाग के साथ छात्र-छात्राएं भी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा करते थे। नए पैटर्न से कई तरह के बदलाव हुए हैं, जिसमें शिक्षकों को हर तीसरे माह के लिए तय पाठ्यक्रमों को पूरा करना है। हालांकि अभी तक किताबें नहीं आ पाईं हैं। ऐसे में पहली परीक्षा कराने के वास्तविक लक्ष्य पर तो पानी फिरना भी तय है। नए निर्देशों को मानें तो पहली परीक्षा जुलाई के अंत में होने की संभावना है, जबकि छमाही परीक्षा अक्टूबर में तथा तीसरी परीक्षा जनवरी और वार्षिक परीक्षा को मानते हुए चौथी परीक्षा मार्च में कराई जाएगी।
इस माह में परीक्षा परिणाम जारी होंगे और अप्रैल से नवीन शिक्षा सत्र की शुरुआत करेंगे। इस तरह का खाका तो विभाग ने खींच लिया है, लेकिन स्कूलों में पढ़ाई ही ढर्रे पर नहीं आ सकी है। सभी परीक्षाओं के परिणाम एक सप्ताह में घोषित कर दिए जाएंगे। यह सब कुछ निपुण भारत मिशन के तहत तय किए गए लक्ष्यों के आधार पर होना है।
हिंदी और गणित में छात्रों को निपुण बनाने की है तैयारी
परिषदीय स्कूलों में निपुण भारत मिशन से गणित और हिंदी पर जोर दिया जा रहा है। संख्या ज्ञान तथा मूलभूत साक्षरता पर विशेष जोर है। हिंदी भाषा में सरल शब्दों से बने वाक्यों से लेकर अनुच्छेद पढ़कर प्रश्नों को हल करने तक बच्चों को सिखाया जाएगा। इसी प्रकार गणित में साधारण जोड़ घटाव से लेकर गुणा के प्रश्न तक बच्चों को सिखाने की तैयारी है। परीक्षाओं के माध्यम से ही छात्रों के क्षमता का आकलन होगा। निपुण लक्ष्य हासिल करने वाले छात्रों को निपुण छात्र की उपाधि भी मिलनी है।
नये प्रयोग कर रहे
परिषदीय स्कूलों में नियमों के बोझ से शिक्षक परेशान हैं। पढ़ाई के लिए सबसे जरूरी किताबें हैं, वह मिल ही नहीं पातीं। नए-नए प्रयोग बनाकर बेवजह परेशान किया जा रहा है। समय से किताबें न देने वाले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
विनय तिवारी, अध्यक्ष शिक्षक संघ
निपुण भारत मिशन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं। परीक्षाएं शासन से तय नियम और मानक के हिसाब से कराया जाएगा। डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह, बीएसए