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Gonda News: गांवों की तरफ बढ़ने लगा सरयू का पानी

Sat, 02 Aug 2025 11:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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नवाबगंज के साकीपुर में जमीन में हो रहा कटान। - संवाद
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करनैलगंज (गोंडा)। उफनाई सरयू का पानी अब गांवों की तरफ रुख कर रहा है। सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र दो सेंटीमीटर नीचे स्थिर है। वहीं, पानी का डिस्चार्ज बढ़कर लगभग 2.57 लाख क्यूसेक पहुंच गया है।
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शारदा, गिरिजा व सरयू बैराजों से छोड़े जा रहे पानी की आमद भी लगातार हो रही है। पानी का फैलाव तेज होने के कारण जलस्तर स्थिर है। बाढ़ का पानी अब मैदानी इलाकों से गांवों की तरफ बढ़ रहा है। इसमें सबसे पहले गोंडा की सीमा पर बसे बाराबंकी जिले के ग्राम बेहटा, पारा, मांझा रायपुर बाढ़ की जद में आएंगे। ग्राम चंदापुर किटौली के चार मजरे और ग्राम नकहरा के नौ मजरे भी बाढ़ से प्रभावित होंगे। यदि जलस्तर में वृद्धि नहीं हुई तो भी इन गांवों की आबादी पानी से घिर जाएगी।
शुक्रवार को सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र तीन सेंटीमीटर नीचे था। बीते 24 घंटे में जलस्तर एक सेंटीमीटर बढ़ा है। नदी और बांध के बीच की भूमि को कटान से बचाने के लिए बल्लियों से पायलिंग का काम तेज कर दिया गया है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि जलस्तर स्थिर है। निगरानी बढ़ाई गई है। जहां नदी बांध से सटी है, वहां लगातार पत्थर डलवाने और पत्थर से पिचिंग का काम कराया जा रहा है। किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
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मुख्य अभियंता गोरखपुर ने किया निरीक्षण
करनैलगंज (गोंडा)। बाढ़ खंड के अधिकारियों ने शनिवार को एल्गिन-चरसड़ी बांध का निरीक्षण किया। मुख्य अभियंता स्तर-1 पूर्वी गोरखपुर अवधेश कुमार ने ग्राम बहुवन मदार मांझा के सामने स्थित एल्गिन चरसड़ी बांध तथा बनाए गए तीनों स्परों का निरीक्षण किया। अधिकारियों की टीम ने चंदापुर किटौली के पास अतिसंवेदनशील बांध का निरीक्षण करके आवश्यक निर्देश दिए। मुख्य अभियंता ने कहा कि बांध की कड़ी निगरानी की जाए। जहां भी नदी का पानी बांध के किनारे है वहां विशेष रूप से नजर रखी जाए। इस मौके पर अधीक्षण अभियंता मनोज साहू, अधिशासी अभियंता जय सिंह, सहायक अभियंता पंकज आर्य, अवर अभियंता रवि वर्मा आदि मौजूद रहे।
चहलावा से शुक्लापुरवा तक कटान तेज
विश्नोहरपुर (गोंडा) शुक्ला पुरवा माझा निवासी राम मनोरथ का आवासीय छप्पर सप्ताह भर पहले पानी में समा चुका है। वहां से 50 मीटर दूर उन्होंने दूसरा छप्पर रखा था, लेकिन अब वह भी कटान के समीप है। वहीं, धान का ढाई बीघा खेत भी पानी में समा चुका है। एक नल भी कटान की भेंट चढ़ चुका है। शेष कुमार का एक छप्पर कटान में बह गया। तीन बीघा आबादी की जमीन भी कट गई। सत्यम के गन्ने के खेत व आवासीय छप्पर के पास कटान हो रहा है। चहलावा में भी यही हाल है। राम मिलन का पक्का मकान कटान की जद में आ गया है। मजरों में बिजली सप्लाई तीन दिन से बंद है।
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