नवाबगंज के ब्योंदा माझा गांव में नाव से जाते लोग। - संवाद
करनैलगंज/विश्नोहरपुर। सरयू नदी खतरे के निशान से 36 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गई है। नदी में पानी का डिस्चार्ज भी घटकर 2.75 लाख क्यूसेक पहुंच गया है। जलस्तर घटने से बाढ़ से प्रभावित गांवों के लोगों की चिंता कम हो गई है। हालांकि, नवाबगंज के ब्योंदा माझा में अभी भी बाढ़ का पानी भरा है। ग्रामीण नाव से ही आवागमन कर रहे हैं।
रविवार को हुई बरसात के बाद फिर से जलस्तर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही थी। मगर सोमवार को दोपहर बाद से जलस्तर स्थिर बना रहा। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पंकज आर्य का कहना है कि नदी का जलस्तर काफी नीचे चल रहा है। अब जलस्तर बढ़ने की संभावना कम है। वहीं, नवाबगंज में सरयू के बढ़ते जलस्तर में सोमवार को भी गिरावट देखने को मिली। इससे बाढ़ प्रभावितो को राहत मिली है। साकीपुर के चहलावा व दत्तनगर के बाड़ी में कटान से भी लोगों को राहत है। दोनों गांवों में नदी के तट पर बसे आधा दर्जन मजरे कटान की मार झेलते हैं। इस बार इन मजरों के लोगों को कटान का अभी तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया है, जबकि धान व गन्ने सहित आवासीय भूमि नदी में समा चुकी है। वहीं, बाढ़ से प्रभावित दोनों गांवों में इस बार न तो राहत किट बांटी गई और न ही पशुओं का भूसा। पलायन कर सड़क पर रहे लोगों को लंच पैकेट भी इस बार नसीब नहीं हुआ।
310 बाढ़ पीड़ितों को बांटी राहत किट
बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायत ब्योदा माझा के राजस्व ग्राम पलिया चरौठा के ग्रामीणों को विधायक प्रेमनरायन पांडेय ने सोमवार को राहत किट का वितरण किया। विधायक ने बाढ़ पीड़ितों से जानकारी भी ली। नायब तहसीलदार अनुराग पांडेय, कानूनगो आदित्य सिंह, लेखपाल राजकुमार पांडेय सहित अन्य मौजूद रहे।