गोंडा। राजेंद्र नगर मेवातियान में रविवार को जर्जर मकान की छत ढहने के बाद 108 एंबुलेंस पर कार्यरत ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) की दक्षता की पोल भी खुल गई। सामने आया कि ईएमटी आपात स्थिति में मरीजों को सीपीआर देने में निपुण ही नहीं हैं। मामला सामने आने के बाद मंडलायुक्त शशिभूषण लाल सुशील ने चारों जिलों के डीएम से ईएमटी की पूरी रिपोर्ट तलब की है।
दरअसल, हादसे के बाद अफसरों ने मलबे से निकाले गए एक मजदूर को सीपीआर देने के लिए एंबुलेंस के ईएमटी से कहा। इस पर उसने हाथ खड़े कर दिए। बताया कि उसे सीपीआर की जानकारी नहीं है। जबकि ईएमटी की नियुक्ति के लिए निर्धारित अर्हता में जीव विज्ञान से बारहवीं की पढ़ाई के साथ ही इमरजेंसी मेडिकल सर्विस का डिप्लोमा व तीन साल के अनुभव की बात कही गई है। सीपीआर इमरजेंसी मेडिकल में आता है। इसके बाद भी कर्मी को जानकारी न होने का मामला आने पर अधिकारी गंभीर हो गए हैं।
मंडलायुक्त ने गोंडा, बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती के डीएम से जिलों में कार्यरत ईएमटी का पूरा विवरण तीन दिन के भीतर तलब किया है। इसमें उनका नाम, पता, मोबाइल नंबर, तैनाती स्थल, तैनाती तिथि, शैक्षिक व चिकित्सकीय प्रमाणपत्र, सेवा में भर्ती होने का स्रोत भी पूछा गया है।
ये है सीपीआर
यह एक जीवनरक्षक तकनीक है जो हार्ट अटैक जैसी आपात स्थिति में जीवनरक्षक साबित हो सकती है। सीपीआर के लिए सबसे पहले रोगी के कपड़े और बेल्ट ढीला कर दें। सीपीआर देते समय एक मिनट में कम से कम 100-120 बार पंप करें। हमेशा सीधे हाथ से सीपीआर दें, कोहनी मुड़नी नहीं चाहिए। त्वरित उपचार के रूप में रोगी को डिस्प्रिन की एक गोली लें और मुंह में रखें, ये गोली खुद ही घुल जाती है। इसके साथ मरीज की सांस और नाड़ी को चेक करते रहें और बार-बार सीपीआर देते रहें, जब तक कि धड़कन चलने न लगे।