गोंडा। सनातन और वामपंथ की विचारधारा में वही अंतर है, जो अंतर भगवान श्रीराम और रावण की विचारधारा में था। एक ओर जहां सनातन विचारधारा लोक कल्याण, धर्म, मर्यादा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। वहीं, दूसरी ओर वामपंथ विचारधारा समाज को भ्रमित कर विनाश की ओर ले जाती है। ये विचार महाकालेश्वर पीठाधीश्वर स्वामी प्रणवपुरी महाराज ने रविवार को शहीदे आजम सरदार भगत सिंह इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित रामकथा मेंं व्यक्त किए।
राम-रावण युद्ध प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने त्रिजिटा और माता सीता के संवाद की मार्मिक कथा सुनाई। कहा कि युद्ध के दौरान माता सीता के मन में यह प्रश्न उठा कि प्रभु श्रीराम यदि चाहें तो एक ही क्षण में रावण के हृदय में बाण चलाकर अंत कर सकते हैं। फिर भी वे बार-बार उसका मस्तक काट रहे हैं, किंतु हृदय का भेदन क्यों नहीं कर रहे। इस पर त्रिजिटा ने माता सीता को समझाते हुए कहा कि रावण के हृदय में आपका वास है और आपके हृदय में स्वयं श्रीराम तथा उनके हृदय में समस्त ब्रह्मांड का वास है।
यदि रावण के हृदय में बाण चला दिया गया तो उससे समस्त लोकों का अहित हो सकता है। इसलिए भगवान श्रीराम अपने व्यक्तिगत उद्देश्य से अधिक लोक कल्याण को महत्व दे रहे हैं, भले ही उनके कार्य में विलंब हो रहा हो। प्रवाचक ने कहा कि यही सनातन धर्म की मूल भावना है, जिसमें स्वयं के कष्ट से अधिक समाज और सृष्टि के हित को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रवाचक ने कहा कि अंततः भगवान श्रीराम ने धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए रावण का वध किया। रावण के अंत के साथ ही लंका में अहंकार, अत्याचार और अन्याय का भी अंत हो गया। कथा में पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह, जन्मेजय सिंह, एनएस भदौरिया, बृजमोहन शुक्ल, अरुण सिंह, राजीव रस्तोगी आदि उपस्थित रहे।