गोंडा। पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सरगर्मी भी तेज हो गई है। 15 सितंबर तक बूथ लेवल अफसरों को तय करने और उनके लिए बीएलओ किट तैयार हो चुका होगा। इसके साथ ही वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों की रिपोर्ट भी तैयार होगी।
चुनाव लड़ने की प्रक्रिया में शामिल रहे लोगों को आयोग के निर्देशों पर अपना हिसाब देना होता है। पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही चुनाव लड़ चुके लोगों की भी आयोग पड़ताल करेगा, जिससे आगे की रणनीति तैयार हो सके।
पंचायत चुनाव का आगाज तो पंचायत सूची के पुनरीक्षण के साथ ही हो जाएगा। 15 सितंबर तक तैयारी करके प्रशिक्षण आदि कराने के बाद एक अक्तूबर से अभियान बूथ स्तर पर शुरू होने की तैयारी हो रही है। वहीं आयोग के सक्रिय होने के बाद चुनाव की अन्य तैयारियां भी जोर पकड़ेंगी। जिसमें पंचायत चुनाव 2015 लड़ चुके प्रत्याशियों की रिपोर्ट भी तैयार होगी।
16 विकास खंडों के 1044 पंचायतों के प्रधानों और 13136 पंचायत सदस्यों के पदों के लिए हुए चुनाव में 22988 लोग मैदान में उतरे थे। इसी तरह 51 जिला पंचायत सदस्यों और 1240 क्षेत्र पंचायत सदस्यों के लिए 94510 प्रत्याशी थे। इसमें जिला पंचायत सदस्य के 830 और क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर 8580 लोगों ने ताल ठोंकी थी।
अब पांच साल पूरे होने के साथ ही चुनाव लड़ने वालों के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। इसमें खर्च का हिसाब देने के साथ ही आयोग की गाइडलाइन के आधार पर अपनी रिपोर्ट जमा करने और ऐसा न करने वाले सूचीबद्ध होंगे। माना जा रहा है कि आयोग के निर्देशों के तहत चुनाव लड़ने की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगा।
पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने से गांवों में बढ़ा सियासी पारा
पंचायत चुनाव के लिए प्रक्रिया शुरू होने पर हर किसी की नजर थी। पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही गांवों में सियासी पारा गर्म हो गया है। चर्चाओं का दौर शुरू होने के साथ ही कौन तैयारी कर रहा है और क्या गांव की तस्वीर होगी, इसकी चर्चाएं जोर पकड़ने लगी है। सोशल मीडिया पर तो बाकायदा वोट मांगने का वीडियो एलबम तक लोड़ होने लगा है। भले ही अभी आरक्षण की स्थिति तय न हो लेकिन लड़ने वाले लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए रणनीति के तहत काम कर रहे हैं। यही नही गावों में लोगों के जोड़ने की मुहिम भी तेज हो गई है और दांवपेंच भी देखने को मिल रहे हैं।
सियासी पारे के बीच गांवों की शिकायतों के दौर में आई तेजी
पंचायत में सियासत तेज होने के साथ ही शिकायतों का दौर भी तेज हो गया है। विकास कार्यों की जांच के बहाने मौजूदा प्रतिनिधियों को घेरने और अपनी साख बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है। सत्तापक्ष के यहां भी लोग जुटने लगे हैं और अपने दावे व पकड़ बता रहे हैं। जिले में अब तक करीब 104 पंचायतों की जांच भी हो रही है, इसके अलावा आईजीआरएस व अन्य माध्यमों से लगातार शिकायतें अधिकारियों के यहां पहुंचने लगी है।
मिले हैं तैयारी के निर्देश
राज्य निर्वाचन आयोग से मतदाता पुनरीक्षण के बारे में तैयारी के निर्देश मिले हैं। उसके तहत तैयारी हो रही है, हर कार्य पर नजर रखी जा रही है। आयोग के निर्देशों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- राकेश सिंह, एडीएम प्रभारी पंचायत निर्वाचन