गोंडा। प्राचीन काल का पौराणिक पृथ्वीनाथ शिव मंदिर में सावन माह के अवसर पर एक माह तक चलने वाला मेला इस बार कोविड 19 को लेकर नहीं लगेगा। साथ ही मन्दिर भी एक माह तक बंद रहेगा। यहाँ नित्य बड़ी संख्या में महिला पुरुष श्रद्धालु विशाल शिवलाट पर जलाभिषेक व पूजन-अर्चन करने आते थे।
खरगूपुर नगर पंचायत से तीन किलोमीटर पश्चिम स्थित पृथ्वीनाथ मन्दिर है। मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान भीम ने शिवलिंग की स्थापना की थी। यह शिवलिंग प्राचीन काल की बताई जाती है। मन्दिर में स्थापित साढ़े पांच फुट ऊँचा शिवलिंग काले-कसौटे दुर्लभ पत्थरों से निर्मित है।
टीले पर स्थित इस मंदिर के बारे में जानकारों का कहना है कि मुगल सम्राट काल में उनके एक सेनापति ने पूजा-अर्चना की और मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। भीम द्वारा स्थापित यह शिवलिंग धीरे-धीरे जमीन में समा गया।
कालांतर में खरगूपुर के राजा गुमान सिंह की अनुमति से यहाँ के निवासी पृथ्वी सिंह ने मकान निर्माण के लिए खोदाई शुरू करायी। उसी रात स्वप्न में पता चला कि नीचे सात खण्डों का शिव दबा हुआ है।
इसके बाद पृथ्वी सिंह ने पूरे टीले की पुन: खोदाई करायी, जहाँ पर एक विशाल शिवलिंग उभर कर सामने आया। उन्होंने इसके बाद हवन के उपरान्त पूजन-अर्चन शुरू कराया। तभी से इसका नाम पृथ्वीनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया और बड़ी संख्या में लोगों के आस्था का केंद्र बन गया।
बताया जाता है कि लगभग तीन दशक पूर्व तत्कालीन सांसद आनंद सिंह के पत्र पर पुरातत्व विभाग की जांच में पाया गया कि उक्त मंदिर में स्थित शिवलिंग एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है, जो पांच हजार वर्ष पूर्व महाभारत काल का है। लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से दर्शन पूजन व जलाभिषेक करने से मनवांछित फल प्राप्त होता है।
श्रावण मास के अवसर पर यहां 25 जुलाई रविवार से शुरू होकर एक माह तक मेले व जलाभिषेक कार्यक्रम चलना था। लेकिन कोविड 19 को लेकर मन्दिर के विशाल शिवलिंग पर जलाभिषेक व पूजन अर्चन का कार्यक्रम बंद रहेगा। साथ ही सावन माह में मंदिर भी बंद रहेगा।
मन्दिर के मुख्य पुजारी जगदंबा प्रसाद तिवारी ने बताया कि श्रद्धालु जलाभिषेक, पूजन अर्चन, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप, श्रृंगार पूजा आदि कार्यक्रम अपने अपने घरों पर ही करें। प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सोनकर ने बताया कि मन्दिर परिसर में पर्याप्त पुलिस बल की ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे श्रद्धालु मंदिर तक न पहुंच सके।