संविदा बिजली कर्मियों के रजिस्ट्रेशन, ईपीएफ व वेतन भुगतान सहित अन्य मांगों को लेकर शनिवार को बिजली कर्मचारी संघ ने अधिशाषी अभियंता कार्यालय पर प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से शुरू हुए बिजली कर्मियों के प्रदर्शन के काफी देर बाद अधिशाषी अभियंता ने कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर उनसे दो घंटे तक वार्ता भी की। लेकिन कुछ मुद्दों को छोड़ बाकी का कोई हल नहीं निकल पाया। जिसके बाद अगली वार्ता नौ फरवरी को तय की गई। वहीं अधिशाषी अभियंता से मिले आश्वासन के बाद बिजलीकर्मियों ने हड़ताल भी वापस ले ली है।
हालांकि संघ के नेताओं का कहना है कि अगर 9 फरवरी को उनके मुद्दों पर विचार करते हुए उसका समाधान नहीं किया गया तो वह फिर से आंदोलन शुरू कर देंगे।
पावर कॉर्पोरेशन के गोंडा डिवीजन में करीब साढ़े तीन सौ संविदा बिजलीकर्मी ठेकेदारी प्रथा के आधार पर काम करते हैं। इनमें से किसी भी संविदा बिजलीकर्मी को न तो ईपीएफ की कोई रसीद मिली है और न ही रजिस्ट्रेशन के अभिलेख। ऊपर से इन संविदा बिजली कर्मियों में 16 कर्मी ऐसे हैं, जिनका वेतन सितंबर से अटका पड़ा है।
जिसे लेकर बिजली कर्मचारी संघ लगातार एक्सईएन से वार्ता कर समस्या का हल निकाले जाने की पैरवी में जुटा है। लेकिन अधिशाषी अभियंता की तरफ से बार-बार वार्ता का समय दिए जाने के बाद भी संघ के लोगों की एक्सईएन से मुलाकात नहीं हो पा रही थी। जिसे लेकर शनिवार को बिजली कर्मचारी संघ ने एक्सईएन के कार्यालय पर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
सुबह 10 से 12 बजे तक बिजलीकर्मियों के प्रदर्शन के बाद एक्सईएन राधेश्याम भाष्कर ने संघ के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। जहां दो घंटे तक चली उनकी वार्ता के बावजूद कुछ समस्याओं को छोड़ अन्य समस्याओं पर कोई सहमति नहीं बन पाई।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रजनीकांत पाण्डेय, शेषदत्त शुक्ल, रामकृपाल, लाल मोहम्मद, धर्मेंद्र तिवारी आदि ने बताया कि अगर 9 फरवरी को उनकी समस्याओं को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बनती है तो आंदोलन का निर्णय उसी दिन लिया जाएगा।