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बदहाली के कगार पर जिले के 42 आयुर्वेदिक अस्पताल, ढूढे नहीं मिल रहे डॉक्टर

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गोंडा के राजकीय चिकित्सालय बनगाई में लटका ताला। - फोटो : GONDA
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गोंडा। लोग भले ही प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति पर आज भी भरोसा करते हों तथा आयुर्वेद में कई बीमारियों का इलाज हो लेकिन जिले के 42 आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पताल बदहाली के कगार पर हैं।
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इन अस्पतालों में न तो समय से डॉक्टर मिलते न ही लोगों को दवाएं मिल पा रही हैं। यहां पर कुल 29 डॉक्टरों की ही तैनाती है। आयुर्वेदिक इलाज के लिए लोग अस्पताल पहुंचते हैं तो वहां ताला लटका देख निराश होकर वापस लौट जाते हैं। गुरुवार को आयुर्वेदिक अस्पतालों की पड़ताल करने पर बदहाली की तस्वीर सामने आई।
गुरुवार की सुबह 10 बजकर 37 मिनट पर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बनगाई में ताला लटकता मिला। यहां पर डॉक्टर नीतू सिंह, फार्मासिस्ट सुशील कुमार श्रीवास्तव की तैनाती है। अस्पताल में दवा कराने आए अजय कुमार तिवारी लल्लू, राजेईश्वरी प्रसाद तिवारी, विजय कुमार तिवारी ने बताया कि सुबह नौ बजे हम लोग आए थे तभी से चिकित्सालय खुलने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन अभी तक चिकित्सालय का ताला नहीं खुला।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक डॉक्टर सप्ताह में एक या दो दिन ही आती हैं। फार्मासिस्ट भी गायब रहते हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल बेलवाभान पर सुबह 10:50 पर ताला लटकता मिला। आस पास पूछने पर पता चला कि आज सुबह से ही चिकित्सालय का ताला नहीं खुला। दवा कराने आए जितिन कौशल ने बताया कि वह दवा लेने आया था लेकिन चिकित्सालय में ताला लटक रहा।
लोगों का आरोप है कि राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय धोबहाराय में चिकित्साधिकारी सप्ताह में दिन आती हैं। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय बरांव में भी चिकित्साधिकारी सप्ताह में एक दिन आती है।
इसी तरह से राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय विद्यानगर में फार्मासिस्ट दिसंबर 2020 में सेवानिवृत्ति हो गए। लेकिन चिकित्सालय से मोह भंग नहीं हुआ और वहीं पर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। यही हाल राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय उमरी बेगमगंज का है।
- जिले में 39 आयुर्वेदिक व 03 चिकित्सालय यूनानी चिकित्सालय संचालित हैं। जिसमें 29 चिकित्सालय में चिकित्साधिकारी की तैनाती है। आयुर्वेदिक अस्पतालों में समुचित इलाज मुहैय्या कराने के स्थानीय लोगों समेत हिंदु युवा वाहिनी के पदाधिकारियों ने अधिकारियों से मांग किया।
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