एल्गिन-चरसड़ी बांध में शुरू हुए रिसाव के साथ बंधे की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। नदी का पानी ठीक बंधे से सटकर बह रहा है। जिससे होने वाली कटान किसी भी समय बंधे के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है। वहीं नदी के जलस्तर में आ रही गिरावट और उससे होने वाली कटान व मशीना उठने की संभावनाओं से यहां बांध बचाव के काम में जुटे अधिकारियों के हाथ-पांव भी फूलने लगे हैं।
हालांकि शुक्रवार को कोई खास कटान नहीं हुई। लेकिन माना जा रहा है कि जिस तरह से नदी का पानी घट रहा है उससे अगर कटान व मशाीना उठता है तो बंधे को बचा पाना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि हर स्थिति से निपटने को तैयार प्रशासन ने कानपुर से 37वीं वाहिनी फ्लड कंपनी के लोगों को बुला लिया है, जिनकी मदद जरूरत पड़ने पर ली जाएगी।
एल्गिन-चरसड़ी बांध के डेंजर जोन ग्राम रायपुर के सामने बांध में तेजी से रिसाव हो रहा है। नदी में बाढ़ का पानी अब बांध के दूसरी तरफ भी रिसाव कर भरने लगा है। पानी बढ़ने पर बांध तक पानी आने के साथ ही उससे टकराने लगा है।
नदी ने बीच की खाली पड़ी जमीन को काट कर अपनी धारा में समाहित कर लिया है। पिछले दो सप्ताह में घाघरा एक किमी बांध के किनारे नदी और बांध के बीच की करीब 11 सौ बीघा भूमि काटकर उसे अपने में मिला चुकी है।
बांध पर मौजूद सहायक अभियन्ता अशोक कुमार का कहना है कि नदी बांध से सटकर बह रही है। ज्यादा खतरा नहीं है। वहीं जेई ओंकार सिंह ने बताया कि बांध के दूसरे तरफ पानी का रिसाव होने से बांध को कोई खतरा नहीं है। रिसाव बंद कराने का काम चल रहा है।
उधर, नवाबगंज में सरयू नदी के कहर से यहां के दो दर्जन गांवों के सौ से ऊपर मजरे पानी से लबालब भर गए हैं। दुर्गागंज, माझाराठ, महेशपुर, जफरापुर, जैतपुर माझा, तुलसीपुरमाझा, साकीपुर, दत्तनगर, ढेमवा, गोकुला, नकहरा, सेमराशेषपुर सहित दो दर्जन गांवो के सौ से ऊपर मजरों में पानी घुस आया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत व बचाव कार्य न शुरू होने पर मंडलायुक्त सुधीर कुमार ने जिम्मेदारों को कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा है।