उमरी बेगमगंज (गोंडा)। ऐलीपरसौली के विशुनपुरवा के पास भिखारीपुर- सकरौर बांध कटने के बाद बनाया जा रहा रिंग बांध भी रविवार को हल्की बरसात से ही बह गया। बांध में कटान के बाद बनाए जा रहे रिंग बांध का कार्य धीमी गति से बन रहा था, मिट्टी भी पुराने बांध की प्रयोग कर रहे थे। इसी बीच रविवार को हुई बारिश से रिंग बांध बह गया और फिर 100 गांवों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया हो गया है। बाढ़ कार्य खंड के अधिकारी रिंग बांध को बनाने के लिए कार्य तेज कर दिए हैं, उनका कहना है कि बारिश से रिंग बांध को नुकसान हुआ लेकिन बांध तैयार कर लिया जाएगा।
भिखारीपुर सकरौर बांध के बिशन पुरवा के सामने टूटने के बाद एली परसौली गांव को बाढ़ से बचाने के लिए रिंग बांध बनाया जा रहा था। रिंग बांध बनाए जाने से करीब 14 बीघे जमीन दोनो बांध के बीच में आ गए हैं, जिन पर अब किसानों को खेती कर पाना संभव नही है। सवाल आसपास के गांवों को बाढ़ से बचाने का था तो रिंग बांध बनाने के लिए लोगों ने जमीन छोड़ दी। खेतों में गन्ने की फसल भी लगी थी, इसका नुकसान भी किसानों ने बर्दाश्त कर लिया। लेकिन रविवार को बनाया गया रिंग बांध मामूली बरसात में बह गया। वहीं बचाव कार्य बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। ग्रामीणों ने पहले भी इस रिंग बांध पर सवालिया निशान लगाते हुए इसकी चौड़ाई और ऊंचाई बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने ध्यान नही दिया। अब चार दिनों की पूरी कवायद पर पानी फिर गया है और फिर ऐली परसौली समेत अन्य पंचायतों के सौ गांवों के लोगों की धड़कनें तेज हो गईं हैं कि नदी का बहाव तेज हुआ तो उनके गांवों तक बाढ़ पहुंच जाएगा।
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नदी के कटान से खत्म हो गया विशुनपुरवा गांव का अस्तित्व
सरयू नदी की कटान से पहले भिखारीपुर-सकरौर बांध कटा और अब नदी के निशाने पर उसी दिन से विशुनपुरवा गांव है। लगातार कटान होने से गांव के 65 मकान नदी में समा चुके हैं इसी के साथ ही गांव को नदी ने अपने आगोश में ले लिया है। इससे अब विशुनपुरवा गांव का अस्तित्व समाप्त हो गया है। बताया जा रहा है कि रिंग बांध के साथ ही मूल बंधे से नदी ने गांव में ही तबाही मचा रही, गांव के लोग तो सुरक्षित ठिकानों पर चले गए । अब तो कटान वाले स्थान से ही पता चलता है कि यहीं पर विशुनपुर गांव था। गांव के लोग विस्थापन का दंश झेल रहे हैं, इन परिवारों के पास ना तो कोई जमीन है और न ही रहने का कोई ठिकाना। जमीन पर बाढ़ की तबाही तो आसमान से बारिश का कहर इन परिवारों को राहत के रूप में प्रशासन की तरफ से सर ढकने के लिए पॉलीथिन और पेट भरने के लिए राहत किट प्रदान की जा रही है।
एसडीएम हुए खफा तो किसानों को मिला फसल का मुआवजा
बांध में कटान के बाद रिंग बांध बनने से 8 किसानों का 14 बीघे खेत की फसल नदी के बीच में आ गई और नष्ट हो गई। एसडीएम तरबगंज कुमार ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से वार्ता कर प्रत्येक बीघे के फसल का 20 हजार रुपये देने का फैसला कराया। दो दिनों तक मुआवजा न मिलने पर एसडीएम खफा हुए और उन्होंने जिलाधिकारी को रिपोर्ट भेजने की चेतावनी दी। इसके बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी रुपये लेकर मौके पर पहुंचे रविवार को 8 किसानों को 2 लाख 59 हजार 300 रुपये का अनुदान वितरित किया। अमीन अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि किसान रामनाथ को 24 हजार 900, चन्द्रिका को 29 हजार रुपये, राम दयाल को 1.20 लाख रुपये, राजाराम को तीन हजार रुपये, मोहन लाल को साढ़े तीन हजार रुपये, शिवनाथ को 27 हजार रुपये, भगवानदीन को 51 हजार 200 रुपये तथा अनंत राम को 1800 रुपये सहायता दी गई है। यह अनुदान सिर्फ फसल का है अगर विभाग जमीन लेगा तो अलग से अनुदान दिया जाएगा। लेखपाल अंकित वर्मा ने बताया कि नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
बाढ़ प्रभावितों का हर संभव राहत सहायता दी जा रही है। फसल के नुकसान का मुआवजा दे दिया गया है। अन्य नुकसान का आकलन किया जा रहा है। पीड़ितों को किसी प्रकार की दिक्कत नही होने दी जाएगी। -राजेश कुमार, एसडीएम तरबगंज