गोंडा। दर्जीकुआं स्थित डायट में सोमवार को प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक कर बीएसए ने विलय हुए 100 स्कूलों की सूची जारी कर दी। शिक्षकों का आरोप है कि अधिकारियों ने न तो विलय हुए स्कूलों की दूरी का ध्यान रखा और न ही छात्र संख्या पर विचार किया। आनन-फानन विद्यालयों की सूची जारी कर दी गई।
अमर उजाला ने सोमवार के अंक में तीन जिलों के 105 स्कूलों में विलय का आदेश बरकरार शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। साथ ही शिक्षकों व बच्चों को होने वाली समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था। ऐसे में जिला बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विलय हुए 100 विद्यालयों की सूची आनन-फानन जारी कर दी। मगर मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। शिक्षकों का आरोप है कि कई विद्यालयों को 50 से अधिक नामांकन होने के साथ ही एक किलोमीटर से अधिक दूरी होने के बावजूद विलय की सूची में शामिल कर दिया गया।
प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने कहा कि सूची में कई स्कूल ऐसे शामिल किए गए हैं जो कि तीन किलोमीटर से अधिक दूरी पर हैं। ऐसे में छोटे बच्चे स्कूल कैसे जा पाएंगे? साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी स्कूलों का विलय कर दिया गया। विनय का कहना है कि जारी सूची में सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया है। ऐसे में सूची का पुनरीक्षण किया जाए। साथ ही सरकार के मानकों के आधार पर ही स्कूल विलय किए जाएं।
गड़बड़ी के चलते नहीं हो सका सभी पर फैसला
सूची बीईओ के सर्वे के आधार पर तैयार की गई थी। बैठक के दौरान शिक्षकों ने सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में विलय किए गए सभी स्कूलों पर अंतिम फैसला नहीं हो सका। विलय किए गए 100 स्कूलों की फाइनल सूची जारी कर दी गई है। अगर इसमें भी गड़बड़ी है तो बीईओ से जानकारी ली जा रही है।
अतुल कुमार तिवारी, बीएसए