नामांकन के समय दिए गए शपथपत्र में आपराधिक साक्ष्य छिपाने के आरोप में डीएम आशुतोष निरंजन ने ग्राम पंचायत कोंचवा के प्रधान को बर्खास्त कर दिया। साथ ही डीएम ने ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को सुचारु रूप से संचालित किये जाने के लिए ग्राम पंचायत की तीन सदस्यीय समिति का गठन भी कर दिया है। जो अब गांव में होने वाले सारे कार्य संपादित कराएगी।
जिले के विकासखंड रूपईडीह की ग्राम पंचायत कोंचवा निवासी ओम प्रकाश ने जिलाधिकारी कार्यालय में वाद दाखिल कर कहा था कि वह पंचायत चुनाव 2015 में अपने गांव से खुद ग्राम प्रधान पद के उम्मीदवार थे। यहां से नव निर्वाचित ग्राम प्रधान को सजायाफ्ता होने के कारण उन्हें अनर्ह (अयोग्य) घोषित किया जाए।
उनका आरोप था कि ग्राम प्रधान बहराइच जिले के थाना पयागपुर में दर्ज एक आपराधिक मामले में दो साल की सजा से दंडित किए गए हैं और जेल भी काट चुके हैं। चुनाव में इस बाबत आपत्ति की गई, लेकिन रिटर्निंग अफसर ने कोई कार्रवाई नहीं की।
इस मामले में डीएम की ओर से ग्राम प्रधान रामरंग को 26 मार्च को कारण बताओ नोटिस देकर 15 दिन में जवाब न मिलने पर पद से बर्खास्त किए जाने की चेतावनी दी गई थी। जिस पर ग्राम प्रधान राम रंग ने नोटिस के जवाब में पंचायती राज एक्ट का हवाला देकर अपनी बात जिलाधिकारी के समक्ष रखी।
सभी पक्षों को सुनने और प्राविधानों का अवलोकन करने के बाद डीएम ने पाया कि नामांकन के समय शपथपत्र के सभी कालम में ग्राम प्रधान ने गुणा का निशान लगाया है। जबकि उसने अपने स्पष्टीकरण में खुद स्वीकार किया कि उसे दो वर्ष की सजा हुई है। लेकिन उसने इसका जिक्र नामांकन में नहीं किया। जिला मजिस्ट्रेट ने माना कि प्रधान की ओर से दाखिल शपथ पत्र असत्य है।
रामरंग ने नामांकन के समय दोष सिद्ध होने के बावजूद शपथपत्र में जानबूझ क र अंकित नही किया और मिथ्या घोषणापत्र के आधार पर नामांकनपत्र प्रस्तुत किया। जिसे लेकर डीएम आशुतोष निरंजन ने 16 सितंबर को कोंचवा ग्राम प्रधान रामरंग को प्रधान पद से बर्खास्त करने का आदेश सुना दिया। यही नही डीएम ने गांव के विकास कार्य के लिए कृष्णावती,मोहन लाल व अनमोल की तीन सदस्यीय टीम भी गठित कर दी है।