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Gonda News: कीर्तिवर्धन की निगरानी याचिका खारिज

Fri, 30 Jan 2026 11:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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गोंडा। प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश के विरुद्ध दायर निगरानी वाद में विदेश राज्यमंत्री और उनके सहयोगियों को झटका लगा है। एमपी/एमएलए विशेष कोर्ट ने दांडिक निगरानी वाद को खारिज कर दिया है। यह फैसला भूमि विवाद से संबंधित एक मामले में आया है, जिसमें राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप भी लगे हैं।
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मनकापुर के ग्राम भिटौरा निवासी अजय सिंह ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर आरोप लगाया था कि विपक्षियों ने उनकी पत्नी मनीषा सिंह के नाम बैनामाशुदा 16 डिसमिल भूमि का तीन साल पुराने स्टांप पर बैकडेट में दोबारा बैनामा कराया है। यह बैनामा कथित तौर पर मिथलेश रस्तोगी और कांति सिंह के नाम किया गया। वर्ष 2024 में मनकापुर कोतवाली में मामला दर्ज कराने पर राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। हालांकि, न्यायालय के आदेश से मामले की अग्रिम विवेचना जारी है।



शिकायतकर्ता के अनुसार, जमीन हड़पने के उद्देश्य से सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के प्रतिनिधि राजेश सिंह ने उनके व पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। आरोप है कि राजेश सिंह, पिंकू और सहदेव यादव अवैध रूप से कीर्तिवर्धन सिंह के लिए काम कर रहे हैं और धमकी देकर जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। 11 अगस्त 2025 को विशेष न्यायालय एमपी/एमएलए/सिविल जज सीनियर डिवीजन अपेक्षा सिंह ने मनकापुर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक को आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया था।
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इसके बाद कीर्तिवर्धन सिंह ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में दांडिक निगरानी वाद दायर कर पुनः सुनवाई की मांग की थी। 26 सितंबर 2025 को प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अवर न्यायालय के आदेश के क्रियान्वयन को स्थगित कर दिया था। एडीजे तृतीय/एमपी/एमएलए विशेष न्यायालय में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने बहस की। न्यायाधीश ने फैसला सुरक्षित कर लिया, लेकिन निगरानीकर्ता की ओर से पुनः बहस की मांग को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद निगरानीकर्ता ने 11 बार स्थगन प्रार्थनापत्र दिए। शुक्रवार को भी स्थगन प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया गया, लेकिन न्यायालय में कोई उपस्थित नहीं हुआ। इस पर विपक्षी अजय सिंह के अधिवक्ता ने आपत्ति जताते हुए कहा कि निगरानीकर्ता सुनवाई टालना चाहते हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि निगरानी वाद पोषणीय नहीं है। बार-बार पुकार के बावजूद निगरानीकर्ता की ओर से किसी के हाजिर न होने पर एडीजे (तृतीय) राजेश कुमार (तृतीय) ने स्थगन प्रार्थनापत्र निरस्त करते हुए निगरानीकर्ता की अनुपस्थिति और मामले को आगे न बढ़ा पाने के कारण दांडिक निगरानी वाद खारिज कर दिया।
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