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न बना काकोरी भवन न कचहरी स्टेशन पर लगी लाहिड़ी की प्रतिमा

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गोंडा के छावनी सरकार में स्थित अमर शहीद राजेंद्र नाथ लाहिड़ी का शहीद स्मारक स्थल। - फोटो : GONDA
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गोंडा। काकोरी कांड के नायक अमर शहीद राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी के नाम पर कचहरी रेलवे स्टेशन का नाम बदल कर राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी रेलवे स्टेशन करने समेत आधा दर्जन से अधिक वादे आठ साल पहले किए गए थे। लाहिड़ी दिवस पर वर्ष 2011 में किए गए वायदे के आठ साल गुजर गए। मगर उसपर अमल नहीं हो सका।
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काकोरी कांड के नायक अमर शहीद राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी के बलिदान दिवस पर जेल परिसर स्थित कार्यक्रम स्थल पर तत्कालीन जिलाधिकारी राम बहादुर ने लाहिड़ी के नाम पर खुले मंच से आधा दर्जन से अधिक घोषणाएं की थी। जिसमें कचेहरी रेलवे स्टेशन का नाम बदहलकर राजेंद्र नाथ लाहिड़ी करने, कचहरी रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतारकर लाहिड़ी को जेल लाया गया था। इसलिए कचहरी रेलवे स्टेशन पर लाहिड़ी की प्रतिमा स्थापित कराने, जेल रोड का नाम लाहिड़ी मार्ग करने, लाहिड़ी के नाम पर उद्यान विकसित करने के साथ ही सैनिक कल्याण बोर्ड के समीप काकोरी भवन के निर्माण की घोषणा की थी। मगर तत्कालीन जिलाधिकारी राम बहादुर का यहां से गैर जनपद तबादला होने के बाद उनके वायदे पर अमल नहीं हो सका। वायदे के आठ साल बाद लाहिड़ी दिवस पर पूर्व में की गई घोषणाओं को अमल में लाने को लेकर मौजूदा जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल से लोगों की उम्मीद एक बार फिर जगी है।
लाहिड़ी के बलिदान दिवस पर ये हो चुकी हैं घोषणाएं-
-तत्कालीन जिलाधिकारी सदाकांत ने जेल रोड पर मौजूदा आरटीओ कार्यालय के बगल शहीद लाहिड़ी के नाम पर काकोरी भवन के निर्माण की घोषणा की थी।
-वर्ष 2011 में तत्कालीन जिलाधिकारी राम बहादुर ने कचहरी रेलवे स्टेशन का नाम राजेंद्र नाथ लाहिड़ी रेलवे स्टेशन किए जाने के संबंद्ध में लिखापढ़ी की थी।
-जेल रोड का नाम लाहिड़ी मार्ग किए जाने की घोषणा हुई थी।
-जिस कचहरी रेलवे स्टेशन पर शहीद लाहिड़ी को ट्रेन से उतारकर जेल ले जाया गया था वहां राजेंद्र नाथ लाहिड़ी की एक मूर्ति स्थापना की भी घोषणा हुई थी।
-शहीद लाहिड़ी के नाम पर एक उद्यान को विकसित किए जाने की घोषणा हुई थी।
ये हैं मांगें-
अमर शहीद राजेंद्र नाथ लाहिड़ी के शव को जिस स्थान पर (जेल के बगल स्थित टेढ़ी नदी का घाट) नहलाकर उनका अंतिम संस्कार किया गया था वहां पक्के घाट के निर्माण के साथ-साथ उनके समाधि स्थल का सौंदर्यीकरण कराकर बड़ा रूप देने की मांग समाजसेवी धर्मवीर आर्य ने की है। वहीं उन्होंने लाहिड़ी की जीवनी को हमारा गोंडा की किताब में जोड़े जाने की भी मांग की है।
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मैं मर नहीं रहा, बल्कि आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं
मैं मर नहीं रहा, बल्कि आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने जा रहा हूं .... इसी शब्दघोष के साथ भारत माता के सपूत राजेंद्रनाथ लाहिड़ी ने फांसी के फंदे को चूम लिया था। काकोरी कांड के मुख्य नायक राजेंद्रनाथ को 90 साल पहले गोंडा की जिला जेल में अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी पर लटका दिया था, मगर अंतिम वक्त तक क्रांतिकारी के मुंह से वंदे मातरम का जयघोष गूंजता रहा। राजेंद्रनाथ लाहिड़ी के जिंदा रहते परेशान अंग्रेजी हुकूमत उनकी मौत से भी कांप रही थी। अंग्रेजी हुकूमत को आशंका थी कि राजेंद्रनाथ की मौत की खबर से विद्रोह हो सकता है। ऐसे में फांसी के बाद गोंडा की जिला जेल के समीप टेढ़ी नदी के किनारे लाहिड़ी का गुप-चुप अंतिम संस्कार कर दिया गया।
आज तक नहीं मालूम हुआ अंतिम संस्कार स्थल
राजेंद्रनाथ के अंतिम संस्कार के बाद उनके साथी एक स्मारक बनाना चाहते थे, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत ने ऐसा करने की इजाजत देने से इंकार कर दिया। ऐसे में उनके रिश्तेदारों और क्रांतिकारी साथियों मनमथनाथ गुप्त, लाल बिहारी टंडन, ईश्वरशरण ने अंतिम संस्कार स्थल पर एक बोतल को बतौर निशानी गाड़ दिया था। बाद में अन्य क्रांतिकारी भी दूसरे मामलों में गिरफ्तार कर लिए गए। इसी दरम्यान किसी ने बोतल को उखाड़कर फेंक दिया। कुछ समय बाद क्रांतिकारी साथी मौके पर पहुंचे तो अंतिम संस्कार वाली जगह को खोजना मुश्किल था। बाद में तमाम प्रयास हुए, लेकिन राजेंद्रनाथ लाहिड़ी के स्मारक के लिए वह स्थान चिह्नित नहीं हो सका, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था।
आठ साल की उम्र में जली थी देशभक्ति की मशाल
लाहिड़ी को देशप्रेम और निर्भीकता विरासत में मिली थी। मात्र आठ वर्ष की आयु में बंगाल से काशी (बनारस) में अपने मामा के यहां पढने के लिए आए राजेंद्रनाथ कुछ समय बाद सचिन्द्रनाथ सान्याल के संपर्क में आए तो राष्ट्रभक्ति की ज्वाला धधकने लगी। जल्द ही आजादी के लिए दीवानगी पनपी तो क्रांतिकारियों की टोली बनाकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिवोल्यूशन आर्मी का अस्तित्व सामने आया। बनारस में इस आर्मी की जिम्मेदारी राजेंद्रनाथ लाहिड़ी के कंधों पर थी। अब वक्त था 1925 का। क्रांतिकारी मिशन के लिए देशभक्तों को धन की किल्लत से जूझना पड़ रहा था।
लाहिड़ी ने काकोरी कांड से लंदन को हिला दिया था
राजेंद्रनाथ लाहिड़ी, रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद की बैठक में क्रांतिकारी मिशन के लिए सरकारी खजाना लूटने की योजना बनी। इस मिशन के लिए राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को सर्वेसर्वा बनाया गया। योजना के मुताबिक, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी ने 9 अगस्त 1925 को लखनऊ जिले के काकोरी रेलवे स्टेशन से छूटी सहारनपुर-लखनऊ पैसेन्जर ट्रेन को चेन खींचकर रोका और पंडित रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में अशफाक उल्ला खान, चन्द्रशेखर आजाद व 6 अन्य सहयोगियों ने ट्रेन पर धावा बोलते हुए सरकारी खजाना लूट लिया। इस कांड से ब्रिटेन की महारानी का सिंहासन हिल गया था। नतीजे में अंग्रेजी हुकूमत ने 40 क्रांतिकारियों पर सम्राट के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध छेड़ने, सरकारी खजाना लूटने का मुकदमा चलाया। मुकदमे की जिरह लखनऊ के रिंग थियेटर (वर्तमान में जीपीओ) में हुई थी, जिसमे राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान तथा ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा सुनायी गयी थी।
मुकर्रर तारीख से दो दिन पहले लाहिड़ी को दी गई थी फांसी
रिंग थियेटर की अदालत ने 6 अप्रैल 1927 को फैसला सुनाते हुए क्रांतिकारियों के लिए फांसी की तारीख 19 दिसंबर 1927 को तय किया था, लेकिन काकोरी कांड ने राजेंद्रनाथ को जननायक बना दिया था। अंग्रेजी हुकूमत को खौफ था कि मुकर्रर तारीख पर फांसी स्थल पर क्रांतिवीरों के साथ आम लोग विद्रोह कर सकते हैं। इसी खौफ के कारण अंग्रेजों ने तय तारीख से दो दिन पहले 17 दिसम्बर 1927 को राजेंद्रनाथ लाहिड़ी को गोंडा की जिला जेल में फांसी पर चढ़ा दिया। मौत को सामने देखकर भी राजेंद्रनाथ के चेहरे पर शिकन नहीं थी। जिस दिन राजेन्द्र लाहिड़ी की फांसी होनी थी, उस सुबह भी वह गीता पाठ और व्यायाम में व्यस्त थे। यह देखकर अंग्रेज अफसर दंग रह गए थे। अफसर को चकित देखकर लाहिड़ी ने हंसते हुए कहा था कि मैं मरने नहीं, बल्कि आजाद भारत में पुनर्जन्म लेने के लिए फांसी पर झूलने वाला हूं।
लाहिड़ी के फांसी स्थल को बना दिया म्यूजियम
अमर शहीद राजेन्द्र लाहिड़ी के फांसी के बाद आज तक गोंडा जेल में किसी कैदी को फांसी नहीं दी गई। लाहिड़ी के फांसी घर को म्यूजियम का रूप दिया गया है तथा काल कोठरी को सुरक्षित रखा गया है। हर साल 17 दिसंबर को आम लोगों के लिए फांसी घर खोला जाता है। लोग यहां आकर लाहिड़ी के फांसी घर को देखने के साथ ही जेल अधिकारियों एवम् समाजासेवियों से लाहिड़ी की वीरगाथा की जानकारी लेते हैँ।

गोंडा के जेल में स्थित अमर शहीद राजेंद्र नाथ लाहिड़ी फांसी स्थल।- फोटो : GONDA

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