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जिला जेल में बंद सात कैदी मिले एचआईवी पॉजिटिव

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फोटो-15-गोंडा का जिला कारागार। - संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। जिला कारागार में क्षय रोग विभाग की ओर से तीन दिवसीय शिविर लगाकर बंदियों की जांच की गई। जिसमें सात बंदी एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। वहीं दो कैदियों में एचआईवी के साथ टीबी की भी पुष्टि हुई। कैदियों के एचआईवी पॉजिटिव मिलने से जेल प्रशासन सकते में है।
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जिला कारागार में निरुद्ध कैदी जांच इलाज व निगरानी के अभाव में तेजी से गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उचित इलाज न मिलने टीबी, एचआईवी, चर्म रोग के साथ ही बुखार व अन्य मौसम जनित बीमारियां इन बंदियों पर हावी हो रही हैं। विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुरोध पर क्षय रोग विभाग की टीम ने जिला कारागार में शिविर कर 811 बंदियों व कैदियों की जांच की, जिसमें सात कैदी एचआईवी पॉजिटिव मिले। वहीं दो कैदियों में एचआईवी के साथ टीबी की पुष्टि हुई।
एसीएमओ डॉ. विवेक शरन ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव मरीजों का इलाज एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी एआरटी सेंटर में किया जाएगा। टीबी पीड़ित कैदियों का इलाज जिले के टीबी क्लीनिक के अंतर्गत होगा। जांच टीम में लैब टेक्नीशियन सुनील यादव, विनय गुप्ता, अनुराग सिंह, राहुल कुमार, संदीप सिंह, सुनील यादव, दिनेश कुमार तिवारी, मो असलम आदि रहे।
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खुजली व अन्य चर्म रोगों का बढ़ रहा प्रकोप
जिला कारागार में हाल ही शिविर करने वाले एक निजी डॉक्टर ने बताया कि जिला कारागार में बीमारियां बढ़ रहीं हैं। कोई पिछले कई महीनों से खुजली व अन्य चर्म रोग से पीड़ित है, तो किसी को लगातार बुखार नहीं छोड़ रहा है। उचित जांच न होने से इन मरीजों की बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. सुवर्णा कुमार ने बताया कि बंदी महिलाओं में खून की कमी, कमजोरी की समस्याएं बढ़ी हैं। कई महिलाएं गर्भाशय में संक्रमण से पीड़ित हैं।
क्षमता से दो गुना कैदी होने से बढ़ रही बीमारियां
508 कैदियों की क्षमता वाले जिला कारागार में इस समय 1047 कैदी निरुद्ध हैं। उनके रहने व बीमारियों से बचाव में दिक्कत आती है। संक्रामक बीमारियों से पीड़ित कैदियों के संपर्क में आने से अन्य कैदी भी संक्रमित हो जा रहे हैं। जिला जेल प्रशासन का दावा है कि समय-समय पर शिविर आयोजित कर कैदियों के सेहत की जांच कराई जाती है। गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराकर उनका इलाज कराया जाता है।
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