करनैलगंज (गोंडा)। आठ साल बाद जेल से रिहा हुआ व्यक्ति देर शाम तक घर नहीं पहुंचा। परिजन तलाश में भटक रहे हैं। परिजनों ने पुलिस अधीक्षक एवं जेल अधीक्षक को पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।
करनैलगंज नगर के मोहल्ला सकरौरा पूर्वी निवासी मोहम्मद अली ने बताया कि उनका लड़का लतीफ आठ साल से जेल में बंद था। उसकी रिहाई के कागज जेल पहुंच गए थे। शनिवार को रिहाई होनी थी, जब वह अपने बेटे को लेने जेल पहुंचा तो उसे बताया गया कि शनिवार की सुबह सात बजे जिला कारागार से जमानत पर रिहा कर दिया गया है। शनिवार देर शाम तक वह अपने घर नहीं पहुंचा और न ही उसका कोई पता चल रहा है। मोहम्मद अली का कहना है कि उसकी तलाश कराई जा रही है फिर भी कोई पता नहीं चला।
पीड़ित ने बेटे की तलाश कराने की मांग की है। आरोप है कि बिना परिजनों के पहुंचे ही उनके बेटे को जेल से रिहा कर दिया गया। जबकि 10 बजे सुबह परिजन जिला कारागार पहुंचे तब उन्हें पता चला कि उनके बेटे को सुबह सात बजे रिहा कर दिया गया है। जेलर दीपांकर भारती का कहना है कि नियमानुसार सभी बंदियों के साथ उसे भी छोड़ दिया गया।
बीमारी से जिला जेल के कैदी की हुई मौत
गोंडा। जिला कारागार में निरुद्घ एक कैदी की बीमारी के कारण शुक्रवार की देर रात जिला अस्पताल ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। गैर इरादतन हत्या के आरोप में अदालत ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। फरवरी से जिला कारागार में सजा काट रहा था।
थाना तरबगंज क्षेत्र के जमथा गांव के मजरे पूरे मनियाय के रहने वाले राघवराम (52) के खिलाफ थाना तरबगंज में गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। राघवराम के खिलाफ अदालत में केस चल रहा था। अदालत ने उसे गैर इरादतन हत्या के आरोप में दोष सिद्ध करते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। 18 फरवरी 2022 से जिला कारागार में निरुद्घ चल रहा था। वह हाई ब्लडप्रेशर, शुगर व किडनी की बीमारी से ग्रसित था। शुक्रवार की देररात अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। जेल के बंदी रक्षक शिवकुमार व राहुल कुमार गुप्ता उसे जिला अस्पताल ले जा रहे थे, तभी रास्ते में मौत हो गई। जेलर दीपांकर भारती ने बताया कि कैदी राघवराम बीमार चल रहा था। शुक्रवार की रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल भेजा गया। जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम को भेजा है।