गोंडा। जननी सुरक्षा योजना के तहत जिला महिला अस्पताल में प्रसूताओं को मिलने वाले पौष्टिक आहार की गुणवत्ता दिरकिनार कर खानापूर्ति की जा रही है। मेन्यू के अनुसार पौष्टिक आहार देने के बजाय दाल, रोटी या सब्जी रोटी देकर कोरम पूरा किया जा रहा है। मरीजों को नाश्ते में दूध, फल व ब्रेड कभी कभार ही नसीब होता है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत अस्पताल में प्रसव के बाद प्रसूताओं को मेन्यू के अनुसार सुबह नाश्ता तथा दोपहर व शाम का भोजन देना होता है। सरकार की मंशा के अनुसार प्रसव के शुरुआती घंटों में प्रसूता को पौष्टिक आहार मिले, जिससे जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें। विभागीय मिलीभगत के चलते ठेकेदार पौष्टिक आहार की खानापूर्ति करके ही भुगतान करा लेते हैं।
जिला महिला अस्पताल में सामान्य प्रसव के दौरान कम से कम 48 घंटे और सिजेरियन से प्रसव पर सात से आठ दिन प्रसूता को भर्ती रखा जाता है। इस दौरान प्रसूता को पौष्टिक आहार दिया जाना होता है। जिला महिला अस्पताल में लगे मेन्यू चार्ट के अनुसार प्रसूताओं को सुबह नाश्ते में आधा लीटर शुद्ध व ताजा दूध, चार ब्रेड, दो फल अथवा दो अंडे देने चाहिए। जबकि दोपहर में दाल, चावल, रोटी, सब्जी व सलाद देना होता है। शाम को सब्जी-रोटी अथवा सब्जी-पराठे देने चाहिए।
प्रसूताओं की सेहत में सुधार के लिए मेन्यू में हर दिन मौसमी सब्जी देने का प्रावधान है। ठेकेदार को प्रत्येक प्रसूता को पौष्टिक आहार देने के लिए 90 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान होता है। इसके बावजूद अस्पताल में भर्ती के दौरान प्रसूताओं को पौष्टिक आहार के नाम पर सिर्फ रोटी-दाल या रोटी सब्जी परोसी जा रही है।
नाश्ते में आधा लीटर की जगह सिर्फ एक छोटा गिलास दूध ही दिया जाता है। तीमारदारों की मानें तो भर्ती होने के दो दिन तक ही दूध मिलता है उसके बाद नहीं। ऐसे में आहार तालिका के अनुरूप प्रसूताओं को पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में भर्ती प्रसूता के तीमारदार सुंदरलाल ने बताया कि भर्ती होनेे के पहले दिन एक छोटा गिलास दूध दिया गया था, उसके बाद दाल-रोटी या सब्जी-रोटी ही दी जा रही है। दो दिन तक सुबह दो केले दिए गये। विद्यावती ने बताया कि उनकी बहू को दूध व फल नहीं मिला। सिर्फ रोटी सब्जी व दाल रोटी ही दी गई।
तीन दिन से भर्ती प्रसूता के तीमारदार इतवारी लाल को तो यह भी नहीं पता कि सुबह नाश्ते में दूध, फल तथा ब्रेड मिलती है। उन्होंने बताया कि सिर्फ दाल रोटी या रोटी सब्जी ही दी जा रही है। रमेश कुमार बताते हैं कि खाने की खराब गुणवत्ता के चलते अधिकांश प्रसूताओं का भोजन उनके घर से आता है। जो प्रसूताएं दूर से आती हैं वही अस्पताल का खाना खाती हैं।
जेडी स्वास्थ्य डॉ. अनिल मिश्र का कहना है कि जिला अस्पताल व जिला महिला अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले नाश्ता व भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए औचक निरीक्षण किया जाएगा। यदि पौष्टिक आहार की गुणवत्ता में कमी मिली तो संबधित ठेकेदार पर कार्रवाई की जाएगी।