एल्गिन-चरसड़ी बांध की स्थिति दिनोंदिन खराब होती जा रही है। महज बालू भरी बोरियों व बल्लियों के सहारे बांध में कटान रोकने की जद्दोजहद चल रही है। जबकि एक मशीना ही पूरे बांध को काटने के लिए काफी है।
हालांकि शनिवार को घाघरा का पानी स्थिर होने से कटान कम हुई। लेकिन माना जा रहा है कि जलस्तर तेजी से गिरने पर बंधे को खतरा हो सकता है। ऐसे में अगर बांध कटता है तो करनैलगंज के कई दर्जन गांव और लाखों की आबादी बाढ़ से प्रभावित हो जाएगी। जिनकी धड़कनें लगातार बढ़ी हुई हैं।
उधर बांध को बचाने के लिए कागजों में अब तक करीब 6 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। जबकि रोज के हिसाब से करीब ढाई लाख रुपये बांध बचाव के इंतजामों पर व्यय हो रहे हैं। इसके बावजूद बंध में लगी कटान रुकने का नाम नहीं ले रही।
लगातार हो रही धीरे-धीरे कटान से एल्गिन-चरसड़ी बांध कमजोर होने लगा है। सीमेंट की बोरियों में मिट्टी एवं बालू भरकर नदी में बैकरोलिंग के सहारे बांध को रोकने का काम चल रहा है। जबकि बंधे के बराबर बह रही नदी का दबाव लगातार बंधे पर बना हुआ है। शुक्रवार देर शाम को उठे मशीने ने करीब तीन मीटर कटवन को नदी की धारा में काटकर गिरा दिया। एल्गिन-चरसड़ी बांध का दो किलोमीटर एरिया डेंजर जोन में रखा गया है। जिसके बराबर घाघरा नदी का पा
नी बह रहा है। एसडीएम करनैलगंज अनिल कुमार मिश्र ने कहा कि नदी का जलस्तर शनिवार की सुबह से स्थिर है। हालांकि नदी अभी भी खतरे के निशान से करीब 50 सेमी ऊपर बह रही है। उधर, एल्गिन-चासड़ी बांध अगर कटता है तो उससे करनैलगंज के 72 गांव और उसके 670 मजरे प्रभावित होंगे।
वहीं, नवाबगंज में सरयू नदी का जलस्तर घटने से इलाकाई लोगों ने राहत की सांस ली है। हालांकि नवाबगंज के मांझा इलाके में 13 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं।