गोंडा। आम मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए संचालित किए जा रहे जन औषधि केंद्र कमीशनखोरी के चक्कर में फेल हो गए। डॉक्टर बाहर की कमीशन वाली महंगी दवाएं लिखने से बाज नहीं आ रहे। जन औषधि केंद्र पर नाम मात्र के ग्राहक ही आ रहे हैं। यहां की दवाएं एक्सपायर्ड हो जा रही हैं, तथा दुकानों का किराया तक नहीं निकल पा रहा है।
जिला अस्पताल में मंगलवार को इलाज कराने आई परसपुर की निशा को कान की समस्या थी। डॉक्टर को दिखाने बाहर की दवाएं लिखी गई, जोकि 535 रुपये की मिली। जन औषधि केंद्र के संचालक करन चतुर्वेदी ने बताया कि इसी फार्मूले की दवा उनके यहां 87 रुपये तक मिल जाती। जिला अस्पताल में हर रोज सैकड़ों मरीजों को बाहर की महंगी दवाएं लिखी जाती है। इसके बदले संबंधित डॉक्टर को अच्छा खासा कमीशन मिल जाता है। इसी से परेशान जन औषधि केंद्र संचालक अब दुकान का किराया तक न निकल पाने की बात कह रहे हैं तथा दवाएं एक्स्पॉयर हो जा रही हैं।
केंद्रों पर मिलनी थी छह सौ प्रकार की जेनेरिक दवाएं
प्रधानमंत्री ने गरीबों को बाजार भाव से लगभग पांच गुना कम दर में जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध कराने के पीएम जन औषधि केंद्र की योजना को देश भर में शुरू कराया था। इन दवा दुकानों पर सरकार की ओर से बाजार भाव से करीब पांच से छह गुुना कम रेट पर 600 तरह की जेनेरिक दवाएं बिक्री को मुहैया कराई जाती है, लेकिन निजी व सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों ने कमीशनखोरी के चलते जेनेरिक के बजाए ब्रांडेड दवाएं लिखना जारी रखा है।
औषधि केंद्रों का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा। संचालित केंद्र अब बंद होने की कगार पर पहुंचने लगे हैं। आंबेडकर चौराहा स्थित जन औषधि केंद्र के संचालक करन चौबे ने बताया कि डॉक्टर जेनेरिक दवाएं नहीं लिख रहे हैं और यदि कोई मरीज लेकर जाता है तो उसे भी वापस करवाकर अधिक कमीशन वाली ब्रांडेड दवाएं खरीदने को कहते हैं। गरीब मरीजों को सस्ती दर की दवा का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। जन औषधि केंद्रों पर शुरुआत में मरीजों की लंबी कतार लगती थी।
जिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्र संचालक ने बताया कि पहले औषधि केंद्र 24 घंटे खोले जाने का निर्देश भी था। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के पास बने केंद्रों पर मरीजों का तांता लगा रहता था लेकिन धीरे-धीरे सन्नाटा हो गया। करन ने बताया कि बीच में दवाओं की सप्लाई भी कम हो गई जिससे यहां मौजूद तीन सौ से अधिक तरह की दवाएं खत्म होने लगीं। मौजूदा वक्त में यहां लगभग 40 से 50 तरह की दवाएं ही बची हैं, उनमें भी अधिकांश वो दवाएं हैं, जिन्हें जिला अस्पताल के चिकित्सक नहीं लिखते। कई दवाएं एक्सपायर्ड हो गई हैं।
जिला अस्पताल के सभी डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वह अस्पताल की दवाएं ही लिखें। बहुत जरूरी होने पर जन औषधि केंद्र की दवाएं लिखें। डॉ इंदुबाला, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल