गोंडा। सूरज की तपिश बढ़ने के साथ ही पारा तेजी से चढ़ रहा है। ऐसे में गर्मी बढ़ने के साथ ही डायरिया कहर बरपाने लगा है। उल्टी-दस्त से पस्त लोग अस्पताल पहुंचने लगे हैं। जिला अस्पताल में पिछले तीन दिन में डायरिया के 17 मरीज भर्ती हुए हैं। वहीं, सांस संबंधी बीमारियों से चार लोगों ने दम तोड़ दिया। बदलते मौसम में अस्पताल में मरीजों की संख्या में डेढ़ गुना तक इजाफा हुआ है।
जिले में तापमान 44 डिग्री सेेल्सियस तक पहुंच गया है। ऐसे में इन दिनों बुखार व उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मार्च महीने तक जिला अस्पताल में जहां हर रोज 700 से 800 मरीज आते थे। वहीं, अब मरीजों की संख्या 1200 तक पहुंच गई है। अस्पताल आने वाले मरीजों में अधिकांश उल्टी-दस्त व अन्य मौसम जनित बीमारियों से ग्रसित होते हैं। गुरुवार से शनिवार तक उल्टी-दस्त के 17 मरीज भर्ती हुए। अस्पताल में डायरिया पीड़ित एक महिला के शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन होने पर किडनी प्रभावित हो गई, जिससे डायलिसिस करानी पड़ी। वहीं, मनकापुर की हफीजा बेगम, तरबगंज के चांदपुर की राजकुमारी, छपिया की मालती व कटरा के रामसुंदर की इलाज के दौरान मौत हो गई। ये लोग सांस व अन्य बीमारियों से पीड़ित थे।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. समीर गुप्ता कहना है कि गर्मी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में खानपान में गड़बड़ी से लोग डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। ओपीडी में डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। हर चौथा-पांचवां व्यक्ति उल्टी-दस्त से पीड़ित होकर अस्पताल आ रहा है। इसके अलावा पेट दर्द, ऐंठन और पीलिया के मरीज भी आ रहे हैं।
शरीर में सोडियम-पोटैशियम की कमी
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि अधिक दस्त आने से शरीर में सोडियम और पोटैशियम की कमी हो रही है। शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। साथ ही शरीर में दर्द, कमजोरी, सांस लेने में दिक्कत और झटके आने लगते हैं। उल्टी-दस्त शुरू होते ही पानी में नींबू, चीनी और एक चुटकी नमक मिला घोल तैयार कर लें। उसे धीरे-धीरे पीते रहें। छांछ और नारियल पानी का सेवन भी कर सकते हैं।
इससे करें परहेज
- बाहर गन्ने का रस न पीएं।
- खुले में रखे कटे फल न खाएं।
- बासी भोजन के सेवन से बचें।
- खुले में रखा पानी पीने से बचें।
- बच्चों को बोतल में दूध न दें।
ऐसे करें बचाव
- साबुन से अच्छी तरह हाथ धोकर खाएं।
- पानी अच्छी तरह उबालकर ही पीएं।
- बच्चों की दूध की बोतल हर बार उबालें।
- खाली पेट धूप में बाहर न निकलें
अस्पताल में भर्ती मरीजों का आंकड़ा
तरीख भर्ती मरीज
14 अप्रैल 70
15 अप्रैल 85
16 अप्रैल 45 (दोपहर तक)
पीकू वार्ड में लटका ताला
जिले में बीमार बच्चों के इलाज के लिए तीमारदारों को भटकना पड़ रहा है। वहीं, जिला अस्पताल के परिसर में बने दस बेड के अत्याधुनिक पीआईसी वार्ड में ताला लटकता रहता है। वार्ड में करोड़ों रुपये की मशीनें लगी होने के साथ ही एक बाल रोग विशेषज्ञ 17 स्टाफ नर्स सहित अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, लेकिन इसका लाभ बीमार बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं, प्रमुख अधीक्षक डॉ. सुरेेंद्र रावत ने बताया कि पीकू वार्ड संचालित किया जा रहा है। यदि कोई बच्चा आईसीयू में रखने की स्थिति में आता है, तो उसे भर्ती कराया जाएगा।
कैथेटर लगाने से आने लगा खून, रेफर किया मरीज
जिला अस्पताल की कोविड बिल्डिंग में भर्ती एक मरीज के कैथेटर से खून आने लगा। इस पर आनन-फानन उसे रेफर कर दिया गया। मरीज के परिजनों ने डॉक्टर के सहयोगी पर लापरवाही का आरोप लगाया। दरअसल कौड़िया बाजार के गंगाराम को पेशाब नहीं उतर रही थी। इस पर शुक्रवार दोपहर को उन्हें भर्ती कराया गया। डॉक्टर के सहयोगी ने कैथेटर लगाया तो उसमें लगातार खून आने से मरीज की हालत बिगड़ी गई। आनन-फानन उसे रेफर कर दिया गया। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है।