गोंडा। कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए शासन की ओर से शुरू हुई ‘मुखबिर योजना’ बिना क्रियान्वयन के ही धराशाई हो गई है। योजना शुरू होने के पांच साल बाद भी विभाग इस योजना के तहत सूचना का आदान प्रदान करने को एक भी मुखबिर नहीं ढूंढ सका। इतना ही नहीं अफसरों की उदासीनता से बिना रेडियोलॉजिस्ट चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर भी कार्रवाई बंद पड़ी है। इससे बेटियों के जन्म के दुश्मन बने लोगों के हौसले बुलंद हैं।
बेटियों के किलकारी से हर आंगन को गुंजायमान करने तथा उनके जन्म का अधिकार छीनने वालों पर नकेल कसने के लिए वर्ष 2017 मे ‘मुखबिर योजना’ की शुरुआत हुई थी। इसके तहत लिंग भ्रूण जांच करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जानकारी देने तथा विभाग के साथ मिलकर उसे पकड़वाने वालों एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान था। पांच सालों में विभागीय जिम्मेदारों ने न तो इस योजना के तहत एक भी मुखबिर बनाने का प्रयास किया और न ही दागी सेंटरों की धरपकड़ को लेकर ही कोई कार्यवाही की। जिले में वर्तमान में 64 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं। (संवाद)
एक लाख तक की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान
मुखबिर योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग को ऐसे व्यक्तियों का चुनना था जिन्हें जिले के अस्पतालों व अल्ट्रासाउंड सेंटरों में चोरी छिपे चल रहे लिंग भ्रूण जांच की जानकारी जुटाकर विभाग को देना थी। ताकि विभाग की ओर से ऐसे केंद्रों पर कार्रवाई हो सके। योजना के तहत मुखबिर कोई भी व्यक्ति अथवा गर्भवती बन सकती है। जो ग्राहक बनकर सेंटरों पर जाकर संबधित सेंटर संचालक को पैसे का लालच देकर लिंग भ्रूण जांच कराने को प्रेरित कर धरपकड़ के लिए छापामार कार्रवाई सुनिश्चित कराने का कार्य कर सके। इसके एवज में सूचना देने वाले मुखबिर को 60 हजार रुपया तथा मिथ्या ग्राहक बनकर स्टिंग ऑपरेशन में सफल बनाने वाले को एक लाख रुपया तक की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान भी है। मुखबिर योजना के तहत तीन व्यक्तियों को प्रोत्साहित किया जाना था। यह राशि तीन किश्तों में मिलना थी। पहली किश्त का भुगतान सूचना सही निकलने पर दूसरी किश्त न्यायालय में हाजिरी के दौरान और तीसरी किश्त की राशि न्यायालय से दोषियों को सजा मिलने के बाद मिलती थी। (संवाद)
बिना रेडियोलॉजिस्ट चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटर
जिले में 64 अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित हैं, जिसमें से अधिकांश सेंटर मानक का पालन नहीं कर रहे हैं। कई अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण अप्रशिक्षित कर्मचारी ही मशीन का संचालन तक करते हैं। इससे मरीजों के सेहत पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।
अभी तक किसी व्यक्ति ने मुखबिर बनने के लिए आवेदन नहीं किया है। सामान्य तौर पर विभाग की ओर से अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर निरीक्षण किया जाता है, लिंग भ्रूण जांच करते मिलने वाले सेंटरों पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. राधेश्याम केसरी,सीएमओ