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Gonda News: तुलसी से अदम तक, हिंदी में समृद्ध अपनी कलम

Sun, 13 Sep 2026 11:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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डॉ. शालिनी शुक्ला, डॉ. किरण सिंह व नीता सिंह।
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गोंडा। हिंदी दिवस पर जब हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा की बात होती है तो गोंडा का नाम भी प्रमुखता से सामने आता है। गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस की लोकमंगल परंपरा से लेकर जनकवि रामनाथ सिंह ‘अदम गोंडवी’ की बेबाक जनकविता तक जिले ने हिंदी साहित्य को अलग-अलग रंग और तेवर दिए हैं। कविता, कहानी, आलोचना, निबंध, हास्य-व्यंग्य और मंचीय साहित्य में जिले के रचनाकार लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं।
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साहित्य भूषण से सम्मानित डॉ. सूर्यपाल सिंह कहते हैं कि हिंदी की अपनी अलग पहचान है। आधुनिक दौर में हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पद्य के साथ गद्य की विभिन्न विधाओं का भी विकास हुआ है। साहित्यकार एसपी मिश्र के मुताबिक हिंदी की आलोचना, निबंध और हास्य जैसी विधाओं को मजबूत करने में जिले के साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साहित्यकार डॉ. शैलेंद्र मिश्र कहते हैं कि अदम ने आम आदमी का दर्द जिस बेबाकी से सामने रखा, उससे हिंदी साहित्य में गोंडा की अलग पहचान बनी। आज भी जिले के अनेक कवि जनसरोकारों को अपनी रचनाओं का केंद्र बना रहे हैं।

नई पीढ़ी भी थाम रही साहित्य की मशाल
जिले की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने में नई पीढ़ी के रचनाकार भी सक्रिय हैं। अधिवक्ता और कहानीकार राजेश ओझा की कहानियां कई पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनका कहानी संग्रह ‘कनेर के फूल’ चर्चित रहा है। कवयित्री नीता सिंह के ‘भावनाओं के स्वर’ और ‘काव्य स्पंदन’ काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। कवि परीक्षित तिवारी के अनुसार युवाओं में हिंदी साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है। युवा साहित्यकार ज्योतिमा शुक्ला ने अपनी कविताओं में सामाजिक सरोकार संग वंचित और पीड़ित महिलाओं के मुद्दों को प्रमुखता दी है।
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विदेश तक पहुंची गोंडा की रचनात्मक आवाज
बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत डॉ. उमा सिंह की एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। कविता के साथ कथा, उपन्यास, नाटक और वैचारिक निबंध में सक्रिय डॉ. उमा इंडोनेशिया, मॉरीशस, थाईलैंड, फ्रांस, जापान और अमेरिका में काव्यपाठ कर चुकी हैं। गोंडा की मूल निवासी डॉ. शालिनी शुक्ला वर्तमान में लखनऊ के खुनखुनजी गर्ल्स पीजी कॉलेज में प्राध्यापक हैं। मॉरीशस और दुबई समेत कई देशों में साहित्यिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी रही है।
डाक सेवा के साथ साहित्य साधना
अयोध्या में वरिष्ठ पोस्टमास्टर के पद पर कार्यरत डॉ. किरण सिंह ने नौकरी के साथ साहित्य को भी अपनी रचनात्मक यात्रा का हिस्सा बनाया। गोंडा में जन्मीं डॉ. किरण की कविताओं में नारी संवेदना, ममता, वात्सल्य, शौर्य और सामाजिक सरोकार दिखाई देते हैं। उनकी पुस्तकें ‘अश्रु चंद्रिका’, ‘अव्यक्त संवेदनाएं’ और ‘अनोखी चुलबुली’ प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें साहित्योदय काव्य रत्न, विद्यावाचस्पति, विक्रविद्यासागर और अन्य सम्मान मिल चुके हैं।

डॉ. शालिनी शुक्ला, डॉ. किरण सिंह व नीता सिंह।

डॉ. शालिनी शुक्ला, डॉ. किरण सिंह व नीता सिंह।

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