राप्ती नदी के जलस्तर में कमी आने के बाद भी बाढ़ के हालात में कोई खास सुधार होता नहीं दिख रहा है। जिले में करीब चार लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित है। गांवों व घरों में पानी भर जाने से इन बाढ़ पीड़ितों के समक्ष भोजन का संकट बना हुआ है। पानी से घिरे लोग घरों की छतों तथा सड़कों के किनारे गुजर-बसर कर रहे हैं।
सीमित संसाधनों के चलते प्रशासन पीड़ितों तक राहत व बचाव कार्य पहुंचा पाने में लाचार दिख रहा है। क्षेत्रीय नेताओं तथा स्वयं सेवी संगठनों ने बाढ़ पीड़ितों की मदद शुरू कर दी है। एक-दो दिन में हालात सामान्य होने की संभावना जताई जा रही है।
राप्ती नदी का जलस्तर रविवार को भी खतरे के निशान से 48 सेमी ऊपर 105.100 मीटर पर रहा। जलस्तर दो दिनों में केवल सात सेमी घटा है। बाढ़ से अभी भी जिले के 250 गांव प्रभावित हैं। 67 गांवों के लोग घर छोड़कर छतों तथा ऊंची सड़कों के किनारे गुजर बसर रहे हैं।
एनडीआरएफ की 35 सदस्यीय टीम बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगी है। इन गांवों की करीब चार लाख आबादी के समक्ष भोजन व पानी का संकट है। हजारों एकड़ धान, दलहन तथा गन्ने की फसल बर्बाद हो गई है। तुलसीपुर तहसील का संपर्क तीसरे दिन भी मुख्यालय से कटा हुआ है। बेलहा डिप पर अभी भी पानी का भारी दबाव है।
सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं जंतु उद्यान राज्यमंत्री डॉ. एसपी यादव ने पचपेड़वा क्षेत्र तथा उतरौला विधायक आरिफ अनवर हाशमी ने उतरौला क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा कर पीड़ितों को लंच पैकेट तथा दवाइयां आदि वितरित कीं। राज्यमंत्री ने प्रशासनिक अफसरों को राहत व बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।