तरबगंज की ग्राम पंचायत गड़ौली गांव निवासी तीन महिलाएं फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे विधवा पेंशन का लाभ ले रही हैं। गांव के ही रहने वाले एक व्यक्ति ने जब इस संबंध में जनसूचना अधिकार अधिनियम के जरिये सूचना मांगी तोे मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद उसने जिलाधिकारी से इस फर्जीवाड़े की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जिले में पेंशन को लेकर हो रहा फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन अपात्रों को पेंशन का मामला अखबारों की सुर्खियां बनता है, लेकिन इसके बावजूद इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी नहीं चेत रहे हैं। ताजा मामला तरबगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायत गड़ौली में सामने आया है।
इस गांव में नियमों को ताक पर रखकर फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे अधिकारियों ने दो ऐसी महिलाओं को विधवा पेंशन का लाभ दे दिया, जिनके पति मौजूदा समय में भी जिंदा हैं। इसी गांव के रहने वाले रामओंकार तिवारी के पेंशन को लेकर मांगी गई जनसूचना में इस मामले का खुलासा हुआ है।
रामओंकार तिवारी ने बताया कि उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत गड़ौली में विधवा पेंशन का लाभ पाने वाली महिलाओं की जानकारी मांगी थी। इस सूचना में जो जानकारी मिली, उसके मुताबिक गांव के रहने वाले रामहेत की पत्नी देवमती को विधवा पेंशन मिल रही है, जबकि रामहेत अभी जिंदा हैं। इसी प्रकार गांव के शोभराम भी जिंदा हैं और उनकी पत्नी जनकदुलारी को वर्ष 2006-07 से विधवा पेंशन दी जा रही है।
इसके अलावा गांव के कैलाशचंद्र की मृत्यु करीब चार माह पहले हुई है, लेकिन इनकी पत्नी शांती देवी को वर्ष 2008-09 से ही विधवा पेंशन का लाभ मिल रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव की मिलीभगत से इन लाभार्थियों के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराकर इन्हें पेंशन का लाभ दिलाया जा रहा है। रामओंकार ने डीएम को शिकायती पत्र देकर इस मामले के दोषियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई करने की मांग की है।