विश्नोहरपुर (गोंडा)। बरसात के महीनों में बाढ़ का विकराल रूप नौनिहालों को भी दर्द दे जाता है। दर्जनों विद्यालय भवन बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं जिससे काफी दिनों तक यहां ताला पड़ जाता है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पिछड़ जाती है। विद्यालयों को लेकर भी अभी तक शासन-प्रशासन कोई उपाय नहीं कर पाया है।
क्षेत्र के दर्जन भर परिषदीय विद्यालय बाढ़ के चलते हफ्तों बंद हो जाते हैं। यदि घर से बच्चे सुरक्षित विद्यालय पहुंच भी जाएं तो विद्यालय में जलभराव के चलते पढ़ नहीं सकते। दत्तनगर गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय डीह व मरी माता मंदिर के पास स्थित विद्यालय का यही हाल है।
वहीं साकीपुर के अट्ठाईसा का प्राथमिक विद्यालय, तुलसीपुर माझा में स्थित दो विद्यालय, अंबरपुर, ब्यौंदा माझा, माझाराठ व जैतपुर में एक -एक विद्यालय बाढ़ के चलते बंद हो जाते हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई बाधित रहती है। वहीं चौखड़िया, बलुहा, महंगूपुर सहित आधा दर्जन विद्यालयों में बरसात से ही जलभराव हो जाता है। कुछ में तो मात्र मिट्टी पटाई कर स्थिति में सुधार संभव है लेकिन, इसको लेकर कोई पहल नहीं हुई है। बाढ़ समाप्त हुए छह माह से ज्यादा बीत चुके हैं। लेकिन, नवाबगंज क्षेत्र में सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित इस क्षेत्र में अबतक बाढ़ से बचाव को लेकर कोई ठोस कदम अबतक नहीं उठाए गए हैं।
बाढ़ में डूब जाता है पीएचसी जाने का रास्ता नहीं
बाढ़ का प्रभाव तुलसीपुर माझा में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी पड़ता है। बाढ़ में यहां न तो मरीज पहुंच पाते हैं और न ही डॉक्टर। बाढ़ के समय जब स्वास्थ्य व्यवस्थाएं एलर्ट पर होती हैं तब अस्पताल ही बीमार हो जाता है। सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में इसका निर्माण होना शुरू से ही एक सवाल रहा है। यहां तक पहुंचने का मार्ग भी बाढ़ में कटने के बाद अब तक नहीं बना। वहीं बाढ़ में पानी भरने के बाद डॉक्टर ढेमवा मार्ग पर स्थित बाढ़ चौकी पर इलाज करते हैं। कई एएनएम सेंटर महीनों तक बंद रहते हैं।