जिले की तीनों चीनी मिलें किसानों के गन्ना मूल्य का एक अरब 29 करोड़ रुपये भुगतान दबाए बैठी हैं। किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान न होने पर डीएम ने मिल प्रबंधनों पर नाराजगी जताई है। मिल प्रबंधनों को तत्काल भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
इसके साथ ही बकाया गन्ना मूल्य के बदले किसानों को मिल से चीनी लेने का विकल्प दिया गया है। डीएम प्रीति शुक्ला ने बुधवार को जिले की तीनों चीनी मिलों के अफसरों एवं जिला गन्ना अधिकारी के साथ बैठक कर बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के संबंध में गहन समीक्षा की।
इस दौरान जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह ने डीएम को बताया कि बजाज चीनी मिल इटईमैदा ने जानबूझकर चीनी की बिक्री कम कर दी है जिससे किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान होने में दिक्कत आ रही है।
बजाज चीनी मिल इटईमैदा ने करीब 35 हजार किसानों के 57 करोड़ 21 लाख रुपये भुगतान नहीं किया है। मिल के जीएम केन पीएस चतुर्वेदी को डीएम ने भुगतान के संबंध में कड़ा निर्देश जारी किया है।
डीएम ने किसानों से अपील की है कि यदि किसान चाहें तो गन्ना मूल्य के बराबर मिल से चीनी लेकर बाजार में खुद बेच सकते हैं। डीएम के सुझाव पर जीएम केन ने भी सहमति जताई।
जिला गन्ना अधिकारी ने डीएम को बताया कि शासन से मिली छूट के आधार पर 230 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की दर से चीनी मिल बलरामपुर व शुगर कंपनी तुलसीपुर ने समस्त भुगतान कर दिया है।
शासन ने 280 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य की दर से सभी चीनी मिलों को किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान कराने का निर्देश दिया है। 280 रुपये की दर से बलरामपुर चीनी मिल को 45 करोड़ 43 लाख रुपये और शुगर कंपनी तुलसीपुर को 26 करोड़ 24 लाख रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान करना होगा।
डीएम ने बलरामपुर चीनी मिल के केन मैनेजर राजीव गुप्ता व तुलसीपुर शुगर कंपनी के केन मैनेजर सुनील दत्त यादव को किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का तत्काल भुगतान कराने का निर्देश दिया। दोनों मिलों के केन मैनेजर ने शीघ्र बकाया भुगतान कराने का आश्वासन दिया है।