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दिन में ड्यूटी, रात में गश्त, सोने के लिए सिर्फ इंतजार

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गोंडा। अमन चैन कायम बनाने रखने की अहम जिम्मेदारी निभाने को दिन में ड्यूटी व रात में गश्त करने वाले पुलिस कर्मियों को स्वस्थ बने रहने को जरूरी आठ घंटे की नीद में मयस्सर नहीं होती। जिले में 18 थानों व पुलिस लाइन में कुल मिलाकर 32 सौ के करीब पुलिस कर्मियों की तैनाती है। यह दिन भर मुस्तैदी से ड्यूटी के बाद रात में गश्त कर लोगों में सुरक्षित रहने का एहसास दिलाते हैं। इसके बावजूद सोने के लिए इन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
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आवासीय भवनों की भारी कमी के चलते एक-एक कमरे में तीन-तीन पुलिस कर्मियों को रहना पड़ता है। ऐसे में बैरक में रहने वाले पुलिस कर्मी दूसरे कर्मी के ड्यूटी पर जाने से खाली होने वाले बिस्तर पर कुछ घंटों की नीद ले पाता है। पुलिस थानों में हुई महिला आरक्षियों की तैनाती ने इस परेशानी को और बढ़ा दिया है।
हालांकि पुलिस कर्मियों के रहने की व्यवस्था सुधारने के लिए शासन ने सभी थानों में मल्टीस्टोरी भवन, विवेचना कक्ष का निर्माण कराने के लिए दो साल पहले की धन आवंटित कर दिया था। कई थानों में तो भवन की छत पड़ गयी लेकिन कई थानों में अभी यह कार्य सिर्फ नींव खुदाई तक ही सिमटा है। लापरवाही के कारण कोई भी आवास अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
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इसलिए जिस तरह पुलिस कर्मियों को शिफ्टवार ड्यूटी करनी होती है उसी तरह शिफ्टवार विश्राम कर नीद भी पूरी करने की परेशानी उठानी पड़ रही है। नींद पूरी न हो पाने के कारण ही थानं में तैनात पुलिस कर्मियों में चिड़चिड़ापन व गुस्सा लगातार बढ़ने लगा है।
आवास की किल्लत के कारण ही अधिकांश पुलिस कर्मी अपना परिवार भी साथ नहीं रख पाते हैं, इससे उन्हें घर का भोजन तक नसीब नही पाता। जिले के प्रत्येक पुलिस थाने में औसतन सौ पुलिस कर्मियों की तैनाती है। इसमें 10 से 30 प्रतिशत तक महिला पुलिस कर्मी होती हैं।
वर्तमान में थानों में पुराने जमाने के जर्जर अवस्था में पहुंच चुके दो-चार आवास ही बने हैं । करनैलगंज में जिस थाना भवन में काम काज हो रहा है वह अंग्रेजों के समय का बना है। पुलिस लाइन के आवासीय भवन सहित बैरक में करीब 300 सिपाहियों के रहने की ही सुविधा है।
जिले की सीमा का थाना खोड़ारे में कुल 11 आवास हैं, जिसमें 24 पुलिस कर्मी निवास करते हैं। यहां 81 पुलिस कर्मियों की तैनाती है। शेष लोग किसी बरामदे में या फिर कहीं अलग सिर छिपाने को विवश होते हैं। यही हाल हर थाने का है।
सभी थानों में पुलिस कर्मियों के निवास करने के लिए हर थाने में बैरक, मल्टीस्टोरी आवासीय भवन तथा एक-एक विवेचना कक्ष का निर्माण पिछले दो साल से हो रहा है। खरगूपुर, खोड़ारे सहित कई थानों में आवास की अभी नींव ही डाली गई है।
कई थाने में ग्राउंड फ्लोर की छत डाली गई है तो कहीं पूरा भवन बन गया है लेकिन खिड़की, दरवाजे व फिनशिंग का कार्य नहीं हुआ है। कई थानों में शौचालय की बेहद कमी है जिससे महिला पुलिस कर्मियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश महिला पुलिस कर्मियों को किराए के मकान में रहकर ड्यूटी के लिए प्रतिदिन आना जाना पड़ता है।
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