गर्मी शुरू होने के साथ जीव-जंतु व पशु-पक्षियों के हलक सूखने लगे हैं। तालाब, पोखरा व अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी की जगह धूल उड़ रही है। तापमान में बढ़ोतरी की रफ्तार यही रही तो पेयजल का संकट गहरा जाएगा।
अप्रैल माह की शुरूआत के साथ की सूर्य की तपिश का असर दिखने लगा है। तालाब, पोखरों व नदी नालों के सूखने के कारण पशु पक्षी बेहाल हैं। पानी की तलाश में जंगली जीव बाहर निकल कर गांवों की तरफ जाने लगे हैं।
आदर्श जलाशय भी सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। विकास खण्ड के 65 आदर्श तालाब में पानी नहीं है। लाखों रुपये से बनाये गये ये तालाब बेमकसद साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि तालाबों में पानी उपलब्ध कराया जाए। सहायक विकास अधिकारी जुगला शरण शुक्ला का कहना है कि अभी तक शासन स्तर से कोई आदेश व कोई कार्ययोजना नहीं है।
रुपईडीह, कटरा बाजार व अन्य ब्लाकों में भी प्राकृतिक व खोदे गए पोखर व अन्य जलाशयों सूख पड़े हैं। मुख्य विकास अधिकारी जयंत कुमार दीक्षित ने बताया कि तालाबों, पोखरों व अन्य जल स्रोतों के बारे में सूचना सभी खंड विकास अधिकारियों से मांगी गई है।
जल्दी ही पानी भरवाने के लिए कार्ययोजना तय की जाएगी। ग्राम प्रधान राज्य वित्त एवं अन्य संसाधन से तालाबों में पानी भरवाने का कार्य कर सकते हैं।