गोंडा। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधा पाने के लिए भटकना पड़ रहा है। निगरानी न होने से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की मनमानी मरीजों को भारी पड़ रही है। इन केंद्रों पर न तो समय से डॉक्टर आते है और न ही मरीजों को दवाएं मिल पाती हैं।
इससे इलाज के लिए मरीजों को परेशान होने के बाद निजी चिकित्सकों के पास जाने को मजबूर होना पड़ता है। आरोप है कि इन केंद्रों पर तैनात डॉक्टर विभागीय सेटिंग के चलते महीने में एक दो बार आकर अपनी हाजिरी जरूर लगा देते हैं।
स्वास्थ्य केंद्र रुपईडीह में अधिकांश दिन चिकित्साधिकारी की कुर्सी खाली पड़ी रहती है। इलाज के लिए आने वाले मरीजों को घंटों डॉक्टरों के आने का इंतजार करना पड़ता है।
स्वास्थ्य केंद्र के बाहर के डाक्टर का इंतजार कर रहे सतगुरु प्रसाद, हवलदार, अजय कुमार ने बताया कि हम लोग तीन दिन से इलाज के लिए यहां आ रहे हैं लकिन अभी तक डॉक्टर नहीं मिल पाए हैं।
मजबूरी में निजी क्लीनिक पर जा कर इलाज कराना पड़ेगा। ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर तैनात डाक्टर पूनम यादव पिछले बीस दिसंबर को आई थी, इसके बाद से मरीजों को देखने यहां नहीं आयी।
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र देवतहा में तैनात डाक्टर अजय यादव को रूपईडीह में अटैच करा गया, इससे पीएचसी देवतहा डाक्टर विहीन है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भुलईडीह में भी डाक्टर कभी-कभी ही मरीजों को देखने आते हैं। यहां फार्मासिस्ट अरुण कुमार जायसवाल ही ओपीडी में डाक्टर की जगह मरीजों को देख कर दवा देते हैं।