गोंडा। जिले में विकास की धुरी मानी जानी पंचायतें अब मनमाने ढंग से भुगतान नहीं कर सकेंगी। 1214 पंचायतों को अब टैन नंबर वाणिज्य विभाग से बनवाना जरूरी होगा।
पहले भी पंचायतों ने टैन तो बनवाए थे लेकिन उसका प्रयोग नहीं किया। इससे उनके टैन निष्प्रभावी हो गए। प्रशासन ने इस पर सख्ती दिखाते हुए उन पंचायतों में भुगतान पर रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है जहां का टैन नंबर सक्रिय नहीं है। इसके चलते ही टैन की फेर से कई पंचायतों में विकास से जुड़े कार्य अटकने लगे हैं।
विकास योजनाओं को गांवों में लागू कराने के लिए पंचायतों को बड़े स्तर पर बजट मिलता है। साल भर में पंचायतें पांच सौ करोड़ से अधिक की परियोजनाओं को संचालित करती हैं।
श्रम के साथ ही पंचायतें सामग्री पर खर्च करती हैं। दो सौ करोड़ के करीब का भुगतान सामग्री पर होता है। इसलिए वाणिज्य कर विभाग में पंचायतों को जीएसटी का पंजीकरण कराकर टैन नंबर लेना जरूरी होता है।
बीते सालों में भी टैन नंबर कुछ पंचायतों ने जारी तो कराया लेकिन उसका इस्तेमाल नही किया। इससे कई टैन निष्क्रिय हो गए हैं। करीब तीन सौ पंचायतों के टैन नंबर सक्रिय नही हैं इससे विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन ने सख्ती दिखाई है तो पंचायतों ने टैन नंबर जारी कराने की कार्रवाई शुरू की है। पंचायत राज विभाग का दावा है कि 60 फीसदी के करीब पंचायतों ने टैन नंबर जारी कराया है।
हर परियोजना में जीएसटी कटौती होती है। इसके लिए पंचायतों को टैन नंबर जारी कराना था। कई सालों से कसरत के बाद भी पंचायतें टैन को लेकर गंभीर नही हैं। इस बार प्रशासन ने भुगतान रोकने की चेतावनी दी तो आनन फानन में टैन जारी कराने की कवायद शुरू हुई है। इससे अब पंचायतों को भी जीएसटी जमा करने में आसानी होगी और पूरा हिसाब किताब रखा जा सकेगा।
टैन नंबर जारी होने के बाद पंचायतों में खर्च का हिसाब सही ढंग से मिल सकेगा। मनमाने ढंग से बिल बाउचर के भुगतान पर रोक लगेगी। इससे अब बिल बाउचर तैयार करने में पंचायतें सावधानी बरतेंगी। अभी तक कई मामलों में गलत भुगतान के मामले सामने आ चुके हैं। कई मामलों में प्रशासन ने कार्रवाई भी की है।