पचरन गांव स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर। स्रोत: सोशल मीडिया
गोंडा। गणतंत्र दिवस से पहले जिले की सभी ग्राम पंचायतों की मूर्त व अमूर्त सांस्कृतिक विरासत व धरोहरों की पहचान की जाएगी। इसके लिए 20 जनवरी से दक्ष कर्मचारियों के माध्यम से गांव-गांव सर्वे करके सत्यापन व दस्तावेजीकरण किया जाएगा। विशेष धरोहरों वाले गांवों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी मिल सकेगी। सर्वेक्षण के लिए तैयारी शुरू हो गई है।
जिले में कुल 1,192 ग्राम पंचायतें हैं। नाम व धरोहर ही पंचायतों की पहचान है। अलग-अलग मौके पर मान्यता व विरासत के तौर पर ग्रामीण इसे संजोते आ रहे हैं। मगर कोई प्रामाणिक दस्तावेज न होने से तमाम विरासतें पहचान खो रही हैं। ऐसे में नई पीढ़ी इनसे अनजान रहती है। अधिकारियों का कहना है कि गांवों की विरासत व धरोहरों की पहचान बनी रहे। इसके लिए पंचायतीराज व सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से मेरा गांव मेरी धरोहर थीम पर पहल शुरू की गई है। इसके तहत आगामी 20 से 24 जनवरी तक गांव-गांव विरासत व धरोहर की पहचान के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण होगा। दक्ष कर्मचारियों की टीम से पहचान के साथ ही सत्यापन व दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे लुप्त हो रही धरोहरों को न सिर्फ पहचान मिलेगी बल्कि उनके विकास का रास्ता भी खुलेगा। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से किसी भी गांव की सांस्कृतिक विरासत व धरोहर की जानकारी तुरंत हासिल हो जाएगी।
प्रमाणिकता के लिए होगी बैठक
डीपीआरओ लालजी दूबे ने बताया कि सर्वेक्षण के लिए 10 से 15 जनवरी के बीच ग्राम पंचायत सचिवों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद पूरी बारीकी से गांवों की धरोहरों का सर्वे होगा। गणतंत्र दिवस पर पंचायतों में बैठक की जाएगी। गांव व ब्लॉक स्तर पर प्रमाणिकता की जांच के बाद तथ्यों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इससे आमजन को सुविधा होगी।
एमजीएमडी पोर्टल पर होगा ब्योरा
प्रक्रिया पूरी करने के लिए भारत सरकार की ओर से एमजीएमडी पोर्टल बनाया गया है। इसी पोर्टल के माध्यम से गांव-गांव सर्वेक्षण किया जाएगा। तीन चरणों में प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी की जा रही है।