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फर्जी पट्टे की भूमि पर काबिज 113 लोग, नोटिस के बाद कार्रवाई नहीं

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करनैलगंज(गोंडा)। तहसील क्षेत्र की दो ग्राम पंचायतों में करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि के घोटाले में तीन वर्ष से सिर्फ जांच का सहारा लेकर फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी गई। एक वर्ष पूर्व मंडलायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अख्तियार किया और मामले की जांच एसडीएम को सौंपी थी। जिसपर जांच पूरी करने के बाद पट्टाधारकों को नोटिस जारी करके तहसील से अभिलेख तलब किए गए। नोटिस के बाद आई जांच रिपोर्ट में फर्जी परवाने के आधार पर पट्टा दर्ज होना पाया गया। फर्जी पट्टाधारकों का नाम निरस्त न करके मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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करनैलगंज में तहसील की स्थापना के समय वर्ष 1985-86 में पुरानी तहसील तरबगंज से अभिलेखों के स्थानांतरण में हेराफेरी कराकर फायदा उठाते हुए भू-माफिया ने करीब एक हजार बीघे से अधिक भूमि का अभिलेखों में नाम दर्ज करा लिया। राजस्व ग्राम लालेमऊ एवं बसेरिया में सरकारी भूमि बंजर, नवीन परती, जलमग्न, खलिहान, ग्राम समाज के खातों में दर्ज भूमि को पट्टा दिखाकर नामांतरण बही एवं पट्टा प्रमाण रजिस्टर में बिना दर्ज हुए खातेदारों के नाम दर्ज हैं। इसका प्रमाण उस समय मिला जब दिसंबर 2016 में तत्कालीन एसड़ीएम हरिशंकर लाल शुक्ल को एक गोपनीय प्रार्थना पत्र मिला। पुराने अभिलेखों की नकल एवं खतौनी में दर्ज नामों की सूची थी। यही नहीं इसमें भूमि को पट्टा दिखाकर नाम से दर्ज किए जाने की सूचना के साथ ही गांव या जिले के बाहर रहने वाले कुछ लोगों के नाम भी भूमि दर्ज होने की शिकायत भी थी। जिसमें जिले व प्रदेश से बाहर रहने वाले लोगों के साथ ही सरकारी नौकरी करने वाले करीब दो दर्जन लोग शामिल है।
एसडीएम ने इतने समय से भूमि के घोटाले को समझने के लिए कुछ भूमिधरी खाताधारकों के नाम के खातों को खंगालना शुरू कराया तो किसी भी पुराने अभिलेखों में इसकी पुष्टि नहीं हुई। भूमि करीब एक हजार बीघे से अधिक होने का अनुमान है जिसके लिए गोंडा अभिलेखागार से कुछ पुराने अभिलेखों को खंगाला गया तो पट्टा संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिला। जांच पूरी होने के बाद अक्टूबर 2017 में तहसीलदार ने भूमि पर काबिज 113 लोगों को नोटिस दी। जिसमें ग्राम लालेमऊ के लोग ही शामिल थे। बसेरिया के भूमि घोटाले की जांच अभी ठंडे बस्ते में ही है। नोटिस जारी होने के बाद तहसील प्रशासन ने दोबारा इस मामले पर ध्यान नहीं दिया। अवैध पट्टों को निरस्त व अवैध रुप से काबिज लोगों को बेदखल करने की कार्रवाई में प्रशासन हीलाहवाली करता रहा। करीब एक दर्जन फर्जी पट्टेदारों के ऐसे नाम भी शामिल हैं जिस नाम का कोई व्यक्ति गांव का निवासी नहीं है। मामले में 2017 में तत्कालीन तहसीलदार ने 1994 के एक पट्टेदार को मिले पट्टे का उदाहरण देते हुए सभी अवैध पट्टेदारों का पट्टा वैध करार दे दिया।
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शिकायत एक व्यक्ति ने गोपनीय तरीके से एक वर्ष पूर्व तहसील दिवस में आयुक्त देवीपाटन मंडल से की तो तत्कालीन आयुक्त सुधेश कुमार ओझा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम को जांच करने के निर्देश दिए थे तथा पूरी पत्रावली तलब की थी। आयुक्त देवीपाटन ने मामले को न्यायिक प्रक्रिया में लाकर नोटिस जारी किया था। इतना ही नहीं नायब तहसीलदार सहित कई कर्मचारियों की टीम बनाकर कराई गई जांच में सभी पट्टे फर्जी बताये गए। उसके बावजूद दो वर्षों से फाइल ठंडे बस्ते में है। भूमि पर अवैध कब्जेदारों का कब्जा बना हुआ है। प्रशासन खामोश है, जब मामला उठता है तो जांच का नाम देकर उसे दबा दिया जाता है।
फर्जी तरीके से सरकारी भूमि को नाम से दर्ज कराने के मामले की जानकारी हुई है। सभी भूमिधरों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत पूर्व अधिकारी ने नोटिस देकर उनसे पट्टा संबंधी अभिलेख तलब किया था। जिसमें प्रमाण नहीं मिला है। पत्रावली को पुन: निकलवाकर पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी। जांच के बाद फर्जी पट्टा निरस्त करने के लिए जिलाधिकारी को पत्रावली भेजी जाएगी। हीरालाल, एसडीएम करनैलगंज
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