धानेपुर (गोंडा)। सड़कों पर छुट्टा घूमने वाले मवेशियों को एक स्थान पर रखने के लिए बनाए गए गो आश्रय केंद्र भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए। जिन लोगों को इसके संचालन की जिम्मेदारी दी गई उन्होंने इसे खाने कमाने का जरिया बना लिया। हालत यह है कि जिले के अधिकांश गो आश्रय केंद्र बदहाली का शिकार हो गए और इन केंद्रों में रखे जाने वाले छुट्टा मवेशी सड़क पर घूम रहे हैं। अफसरों की लापरवाही से कहीं गोशाला में पानी भरा है तो कहीं चारे भूसे की अकाल पड़ा है। इन गो आश्रय केंद्रों की देखभाल कर रहे जिम्मेदार अफसर कागजों पर इसका संचालन कर रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाने गए अधिकांश गो आश्रय केंद्रों पर ताला लटक रहा है। गो आश्रय केंद्रों की बदहाली का सबसे अधिक नुकसान किसानों को उठाने पड़ रहा है। किसानों को रात-रात भर जागकर छुट्टा मवेशियों से अपनी खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है तो वहीं यह छुट्टा मवेशी सड़क पर हादसों का कारण बन रहे हैं। इसकी शिकायत शासन तक पहुंचने के बाद अब सरकार ने इन गो आश्रय केंद्रों की सुध ली है और जिले भर में संचालित गो आश्रय केंद्रों के भौतिक हालात का ब्योरा तलब किया है। शासन के पत्र के बाद अब अफसरों में हड़कंप मचा है।
केस-एक
बेज्ुाबान मवेशियों की कब्रगाह बन गई 1.30 करोड़ की गोशाला
मुजेहना ब्लॉक के रुद्रगढ़ नौसी गांव में तीन साल पहले 1.30 करोड़ रुपये की लागत से गो आश्रय केंद्र के निर्माण को स्वीकृति मिली थी। उम्मीद थी कि लागत के मुताबिक इसका निर्माण कराया जाएगा लेकिन पहले ही कदम पर यह गोशाला भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। निर्माण कराने वाले ठेकेदार ने इस भारी भरकम धनराशि में जमकर बंदरबांट किया और समय से इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका। अधूरे निर्माण पर ही इस गौशाला का संचालन शुरू करा दिया गया। पांच सौ मवेशियों के लिए बनी गोशाला में रखे गए आधे से अधिक मवेशी यहां से भाग खड़े हुए। चारे के संकट के चलते कई मवेशियों की मौत हो गई। जिलाधिकारी व सीडीओ ने कई बार इस गो आश्रय केंद्र का निरीक्षण किया लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हो सका। तीन वर्षों में सैकड़ों मवेशी यहां दम तोड़ चुके हैं। मृत मवेशियों के शवों के निस्तारण की उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें इधर उधर फेंक दिया जाता है। स्थानीय लोगों के साथ भाजपा के एक बड़े पदाधिकारी ने शासन स्तर पर इसकी शिकायत की लेकिन संचालन करने वाले रसूखदार अफसरों के आगे उनकी शिकायत दम तोड़ गई।
केस- दो
पानी में डूब गया खौदी गांव में बना गो आश्रय केंद्र
मुजेहना ब्लॉक के ही ग्राम पंचायत खौदी में भी दो साल पहले गो आश्रय केंद्र के निर्माण की स्वीकृति मिली थी। लेकिन यहां भी गौशाला निर्माण में खेल किया गया। जिम्मेदार अधिकारियों ने ठेकेदार से मिलीभगत कर गौशाला का निर्माण सरयू नहर के ठीक बगल बिल्कुल निचले इलाके में करा दिया और गोशाला निर्माण के लिए आवंटित धनराशि को बंदरबांट कर हजम कर गए। हालत यह है कि तीन महीने से यह गो आश्रय केंद्र पानी में डूबा है। केंद्र पर न चारे भूसे की व्यवस्था है और न ही कोई अन्य सुविधा। चारे के अभाव और जलभराव के कारण यहां रखे गए आधे से अधिक मवेशी पलायन कर चुके हैं। वर्तमान में यहां करीब दर्जन भर मवेशी हैं जो आसपास के खेतों में घुसकर किसानों की फसलों से अपना पेट भर रहे हैं। इस बदहाली की जानकारी यहां के जिम्मेदारों को कई बार गांव के लोग दे चुके हैं लेकिन अफसर यहां तक नहीं पहुंच सके हैं।
केस-तीन
हैंडओवर के इंतजार में बंद पड़ी है परसिया पंडित की गोशाला
वित्तीय वर्ष 2020-21 में परसिया पंडित गांव में भी गोशाला निर्माण कराया जाना था। अधिकारियों ने खौदी गौशाला से चंद कदम की दूरी पर ही इसके निर्माण की स्वीकृति दे दी। निर्माण कराने वाले ठेकेदार ने आधा अधूरा निर्माण कराकर भुगतान ले लिया। तकनीकी जांच करने वाले कर्मचारी ने भी ले देकर इसके निर्माण की गुणवत्ता ठीक होने की रिपोर्ट लगा दी। अब यह गो आश्रय केंद्र हैंडओवर के इंतजार में ठप पड़ा है। अधूरा निर्माण होने के चलते ग्राम पंचायत ने इसे हैंडओवर लेने से हाथ खड़ा कर दिया है।
केस -चार
झाड़ियों के बीच करा दिया गो आश्रय केंद्र का निर्माण
मुजेहना ब्लॉक के तेंदुआ मोहनी गांव में तो गो आश्रय केंद्र का निर्माण झाड़ियों के बीच करा दिया गया। निर्माण कराने वाले ठेकेदार ने यहां भी जमकर मनमानी का और अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन को हजम कर गया। यह गो आश्रय केंद्र भी अधूरा पड़ा है। आश्रय केंद्र में झाड़ियां उगी हैं और इसे भी ग्राम पंचायत को हैंडओवर नहीं किया गया है। गांव के अमरेश कुमार का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत ब्लॉक से लेकर जिला प्रशासन तक से की गयी लेकिन अफसरों ने इस शिकायत का संज्ञान तक नहीं लिया। गांव के सचिव विनय भारती से जब गोशाला निर्माण को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने इसकी जानकारी होने से ही इंकार कर दिया। सचिव केंद्र निर्माण में लगने वाली लागत की जानकारी भी नहीं दे सके।
बारिश के चलते तेंदुआ मोहनी व परसिया पंडित में बन रही गोशाला का निर्माण रुका हुआ है। मनरेगा योजना से निर्माण होने के चलते उन्हें भुगतान की जानकारी नहीं है। जबकि खौदी ग्राम पंचायत की गोशाला में पानी भर जाने के कारण उसका संचालन बंद है। यहां के मवेशियों को रुद्रगढ़ नौसी व दुर्जनपुर की गोशाला में शिफ्ट किया गया है। अन्य गो आश्रय केंद्रों का संचालन ग्राम पंचायतें करा रही हैं। कहीं समस्या होने पर उनका निरीक्षण किया जाता है।
-दिलीप कुमार उपाध्याय, एडीओ पंचायत, मुजेहना