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कपूरपुर समेत कई गावों में पहुंचे 300 से अधिक छुट्टा मवेशी

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फोटो- 25- गोंडा के कपूरपुर झंझरी ब्लॉक में गांव के लोगों ने पकड़े छुट्टा पशु। संवाद - फोटो : GONDA
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गोंडा। शहर से सटे झंझरी ब्लॉक के गांवों में छुट्टा मवेशियों का कहर बरप रहा है। कपूरपुर समेत आधा दर्जन गांवों में एक साथ 300 के करीब छुट्टा जानवर पहुंच गए हैं। खेतों को नुकसान करने के साथ कई मवेशी ऐसे हैं जोकि आम लोगों पर हमला कर रहे हैं। कपूरपुर में मवेशियों के हमले में कई ग्रामीणों को चोटें आई हैं। कपूरपुर में गांव के लोगों ने 30 से अधिक मवेशियों को गांव के लोगों ने पकड़ रखा है। ग्राम प्रधान सुरेश कुमार चौबे उर्फ कुट्टू चौबे ने जिलाधिकारी व सीडीओ से मांग की है कि गांव के लोगों की ओर बंधक पशुओं को कहीं बाहर भेजा जाए। गांव के लोगों को राहत मिल सके।
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कपूरपुर के साथ ही बेहड़ा चौबे, मोकलपुर, मसौली, हारीपुर आदि गांवों में बाहर से आए छुट्टा जानवरों से लोगों में भय व्याप्त है। कई मवेशी ऐसे हैं जो लोगों पर हमला कर दे रहे हैं। लोग उनके पास न जाएं तो खेतों को नुकसान कर रहे हैं। गेहूं के साथ सरसों आदि की फसलों को छुट्टा जानवर बर्बाद कर दे रहे हैं। कपूरपुर में पकड़े गए पशुओं को बाहर भेजने के लिए अधिकारियों से बात लोगों ने की तो सभी ने हाथ खड़े कर दिए। नगर पालिका गोंडा के ईओ संजय मिश्र ने तो साफ कह दिया कि एक ही वाहन है, वह भी उपलब्ध नहीं है। इसी तरह करनैलगंज की ईओ प्रियंका ने कहा कि उनके यहां का वाहन मोकलपुर गया था, जहां से नवाबगंज चला गया है। उनके पास भी वाहन नहीं है। सीवीओ डा. रवींद्र सिंह राठौर ने जिम्मेदारी बीडीओ और एडीओ पर छोड़ दिया।
इस मामले में बीडीओ झंझरी और एडीओ ने भी कहा कि वाहन मिले तभी तो पशुओं को कहीं छोड़ा जाए। इस तरह 30 अधिक मवेशी पूरे दिन बंधे रहे और कोई इंतजाम नहीं हो सका। इसके साथ ही अन्य छुट्टा पशु क्षेत्र में किसानों के खेतों को नुकसान कर रहे हैं।
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शाहपुर गोआश्रय में इंतजाम नहीं, चारा-पानी को तरस रहे पशु
नवाबगंज (गोंडा)। छुट्टा घूम रहे गोवंशों के संरक्षण के लिए क्षेत्र के शाहपुर गांव में गोशाला का निर्माण कराया है, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता से गोशाला की हालत बदतर है। छुट्टा घूम रहे गोवंशों को रखा गया है, लेकिन न तो इनके रहने खाने की उचित व्यवस्था है और न देखभाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी हैं। क्षेत्रीय लोगों की मानें तो कई गोवंश अपनी जान गवां चुके हैं। गोवंश गंदा व ठंडा पानी पीने के लिए मजबूर हैं। ठंड से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं है। उनके खाने के लिए उचित चारे की व्यवस्था हो पाती है। भूसा समाप्त होने के दो से चार दिन बाद भूसे की व्यवस्था हो पाती है। गोशाला में 80 से ऊपर गोवंश हैं। 80 से ऊपर जानवर की देखभाल के लिए कम से कम पांच कर्मचारियों की आवश्यकता है। गोशाला के चौकीदार रामचंदर पाठक ने बताया कि छह जनवरी को 28 क्विंटल भूसा खरीद गया था जोकि अब समाप्त हो गया है। बीडीओ राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि भूसा मंगवाया गया है। ठंड से बचाव के लिए अलाव की व्यवस्था कराई गई है।
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