गोंडा। यूं तो हमेशा से सांस की परेशानी होने पर लोगों को टीबी की जांच कराने की सलाह दी जाती है लेकिन अब कोरोना ने सभी की कमर तोड़ दी है। जरा सी खांसी और सर्दी या जुकाम क्या हुआ लोग कोरोना के डर से परेशान हो जाते हैं। यहीं कारण है कि अब जिले भर में टीबी के मरीजों को छोड़कर कोरोना के मरीजों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन इसका असर ये है कि टीबी के मरीजों की देखभाल और उनका इलाज समय से नहीं हो पा रहा है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मलिक आलमगीर ने बताया कि इस साल की शुरूआत में लगभग जिले भर में 6 हजार टीबी के मरीज थे। जो कि अब ठीक होकर लगभग 3 हजार रह गए हैं। लेकिन नए केस का सर्वे नहीं हो पा रहा है। उन्होंने माना कि कोरोना की ड्यूटी के चलते टीबी के कार्यक्रम के संचालन में परेशानी हो रही है। इसका नतीजा है कि नए मरीज टीमें नहीं ढूंढ़ पा रही हैं। बीच में टीबी क्लीनिक के कर्मचारियों को कोरोना की ड्यूटी से हटाया गया था लेकिन बाद में फिर से काम लिया जाने लगा है।
पहले से ही है कर्मचारियों की भारी कमी
जिला क्षय रोग विभाग में पहले से कर्मचारियों की कमी है। बताया जा रहा है कि लगभग 12 से 13 पद खाली पड़े हुए हैं। ऐसे में कर्मचारियों की कमी झेल रहे विभाग पर कोरोना ड्यूटी का ओवरलोड हो रहा है। जिससे इस विभाग का मूल कार्य पूरी तरीके से प्रभावित हो रहा है। इससे कहीं न कहीं क्षयरोग के उन्मूलन कार्यक्रम पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
पुराने मरीजों को इकट्ठा दी जा रही हैं दवाईयां
अब क्योंकि कोरोना में ड्यूटी के चलते पुराने मरीजों की मॉनीटरिंग और नए मरीजों का सर्वे पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है और कोरोना के चलते मरीजों को अस्पताल या फिर सीएचसी पर बुलाना उचित नहीं होता है, तो मरीजों को एक साथ लंबी अवधि का दवाई दी जा रही है।
फैक्ट फाइल
जिले में सीएचसी - 16
टीबी क्लीनिक के लिए सृजित पद - 32
मौजूदा समय में संख्या - 16
एसटीएस की संख्या - 08
एसटीएलएस की संख्या - 08
कोविड जैसी महामारी में दौर में टीबी क्लीनिक के कर्मचारियों ने जबरदस्त मेहनत की है। क्योंकि टीबी क्लीनिक में अधिकांश लोग पैथोलॉजी के जानकार हैं इसलिए कोविड की जांच में इनका सहयोग लिया जा रहा है। कोविड में व्यस्तता के चलते टीबी क्लीनिक का कार्य तो प्रभावित हो ही रहा है।