फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीआईजी की कोरोना रिर्पोट फिर पॉजिटिव, 66 नए संक्रमित मिले

विज्ञापन
फोटो-4 गोंडा के जिला अस्पताल में कोरोनारोधी वैक्सीन का बूस्टर डोज लगाती स्वास्थ्यकर्मी। संवाद - फोटो : GONDA
विज्ञापन
गोंडा। कोरोना संक्रमण का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। हर रोज नए संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। शुक्रवार को देवीपाटन परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक की कोरोना जांच रिपोर्ट फिर से पॉजिटिव मिली है। इसके साथ ही कोरोना संक्रमण के 128 नए मामले सामने आए हैं। वहीं 75लोग कोरोना संक्रमण को मात देकर स्वस्थ हुए हैं।
विज्ञापन

जिले में कोरोना संक्रमण का तेजी से पांव पसार रहा है। अधिकारी, क र्मचारी से लेकर आम आदमी तक चपेट में आ रहे हैं। शुक्रवार को आई कोरोना जांच रिपोर्ट में डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल की आरटीपीसीआर रिर्पोट फिर से पॉजिटिव पाई गई। वहीं पिछले सप्ताह 11 जनवरी को डीआईजी की कोरोना रिर्पोट पॉजिटिव मिलने से वह होम आइसोलेशन में रह रहे थे। बताया जाता है कि दो दिन पहले डीआईजी स्वस्थ होकर कार्य शुरू किए और आरटीपीसीआर जांच के लिए सैंपल दिया था जिसकी रिर्पोट पॉजिटिव आई।
जिला अस्पताल से अंबरीश कुमार सिंह, सीएमओ कार्यालय से विजय लक्ष्मी सिंह, जिला कारागार से रामतेज, एसबीआई बैंक से अनुराग श्रीवास्तव, सहित 128 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई। राहत की बात है कि 75 लोग कोरोना संक्रमण को मात देकर स्वस्थ हुए हैं। इस तरह जिले में सक्रिय कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 687 हो गई है। हालांकि अब तक 333 लोग कोरोना को मात देकर स्वस्थ हो चुके हैं। कोरोना के बढ़ते मरीजों को देखते हुए कोविड हॉस्पिटल के कर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है।
विज्ञापन

आरटीपीसीआर रिपोर्ट में देरी बढ़ा रही समस्या
कोरोना की जांच रिपोर्ट आने में देरी होने के कारण मरीजों के साथ साथ अन्य लोगों की भी परेशानी बढ़ सकती है। संदिग्ध मरीजों की जांच तो की जा रही है, लेकिन रिपोर्ट आने में तीन से चार दिन लग रहे हैं। जांच कराने वाले व्यक्ति लापरवाही बरत रहेे हैं, वह सार्वजनिक स्थानों और अपने घर में परिवार के घुल मिलकर रह रहे हैं। ऐसे ही दो मामलों में संदिग्ध जांच कराकर चले गए। जिला न्यायालय के कर्मचारी योगेश मिश्र ने बताया कि उन्होंने चार दिन पहले दीवानी कचहरी परिसर में सैंपल दिया था लेकिन अभी तक रिपोर्ट नहीं आई। इससे उन्हें यह नहीं पता चल पा रहा है कि वह पॉजिटिव हैं या नहीं। वहीं शहर के पटेलनगर निवासी रामनयन ने बताया कि उनके परिवार के तीन लोगों का आरटीपीसीआर रिर्पोट नहीं आई। जिला अस्पताल में लगी आरटीपीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पॉलीमर्स चेन रिएक्शन टेस्ट) मशीन में सिर्फ कुछ ही सैंपल की जांच खानापूर्ति के लिए की जाती है। अन्य सैंपल को लखनऊ भेजा जाता है। वहीं एंटीजेन की रिपोर्ट पर भी लोग विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। आरटीपीसीआर लैब के इंचार्ज डॉ. जगदीश का कहना है कि जिला अस्पताल स्थित जांच मशीन की क्षमता कम है जिससे सैंपल बाहर भेजना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें