फोटो-10 गोंडा के जिला अस्पताल में वैक्सीन लगाती स्वास्थ्यकर्मी। संवाद
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गोंडा। कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर में महती भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों के साथ साठ साल से अधिक आयु वाले बुजुर्गों को भी बूस्टर डोज लगाया जा रहा है। वहीं बुजुर्ग बूस्टर डोज लेने में पीछे हट रहे हैं। जिले के करीब डेढ़ लाख बुजुर्ग बूस्टर डोज लगवाने के पात्र बताए जा रहे हैं। अभी तक मात्र 449 लोगों ने ही बूस्टर डोज की खुराक ली है।
जिले में साठ साल से अधिक आयु वाले 2,06,259 लोगों ने कोरोनारोधी वैक्सीन के दोनों डोज लगवा लिया है। जिसमें करीब डेढ़ लाख से अधिक लोगों ने मार्च-अप्रैल में लगवाया था, जिनको बीमारी से बचाने के लिए बूस्टर डोज की जरुर है, लेकिन मात्र 449 लोगों ने ही कोरोनारोधी वैक्सीन की बूस्टर डोज लगवाया है। बूस्टर डोज लेने से बुजुर्ग पीछे भाग रहे हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग की परेशानी बढ़ गई है। अब बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाने जा रहा है।
दूसरी डोज के नौ महीने बाद बूस्टर डोज लगवाना जरूरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि गंभीर बीमारी से ग्रसित बुजुर्गों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने के नौ महीने बाद बूस्टर डोज लगवाना जरूरी है। उनमें कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेे। एसीएमओ डॉ. एपी सिंह ने बताया कि गंभीर बीमारियों से ग्रसित वरिष्ठ नागरिकों को बूस्टर डोज लगाने की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव में ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के साथ ही हेल्थ वकर्स को भी बूस्टर डोज दी जा रही है।
हैरत की बात यह है कि इस बार बुजुर्ग बूस्टर डोज लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे। बुजुर्गों के बूस्टर डोज न लगवाने के पीछे की वजह खंगाली जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग आशा बहुओं की मदद ले रहा है। बुजुर्ग व उनके परिवार के लोगों से संपर्क कर उन्हें बूस्टर डोज लगवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्हें कोरोना महामारी से बचाया जा सके। एसीएमओ ने बताया कि बुजुर्गों को अधिक से अधिक डोज लगे, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम डोर टू डोर दस्तक देगी।