गोंडा। साहित्य की भाषा जितनी सहज और सरल होगी, उसका दायरा उतना ही व्यापक होगा। आम आदमी से जुड़ने के लिए साहित्य को बोलचाल की भाषा में लिखना जरूरी है। कठिन और जटिल शब्दावली आम पाठक को साहित्य से दूर करती है। अपनी भाषा में लिखीं रचनाएं पाठक को अपनापन महसूस कराती हैं। यह बात डीएम प्रियंका निरंजन ने रविवार को जिला पंचायत सभागार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं श्री दुर्गा सप्तशती पुस्तक के विमोचन समारोह में कही।
डीएम ने कहा कि भाषा का विकास तभी संभव है, जब साहित्य समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। साहित्यकारों को ऐसी भाषा का प्रयोग करना चाहिए, जिसे आमजन सहजता से समझ सके और अपने जीवन से जोड़ सके। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम और मां भगवती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। इसके बाद अतिथियों ने लेखक राम बुझारथ द्विवेदी की पुस्तक श्री दुर्गा सप्तशती का विमोचन किया। समारोह में भाजपा जिलाध्यक्ष अकबाल बहादुर तिवारी, डॉ. संत शरण त्रिपाठी, महेश सिंह, प्रो. जयशंकर तिवारी, डॉ. अरुण कुमार सिंह, सपा नेता सूरज सिंह, भगौती प्रसाद पांडेय, आदर्श तिवारी, विजय प्रकाश त्रिपाठी, गौरीशंकर चतुर्वेदी, अवधेश शुक्ल, जगन्नाथ प्रसाद शुक्ल, उपेंद्र मिश्र, मनोज मिश्र आदि उपस्थित रहे।