गोंडा। ठंड बढ़ने के साथ सांस, अस्थमा, एलर्जी से पीड़ितों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। पारा गिरने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। रविवार को मेडिकल कॉलेज में भर्ती सांस के रोगी की उपचार के दौरान मौत हो गई।
परसपुर निवासी फखरुद्दीन (65) को सांस की समस्या के चलते मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। दोपहर डेढ़ बजे उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मेडिकल कॉलेज के ईएमओ डॉ. दीपक सिंह ने कहा कि ठंड के चलते सांस के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इमरजेंसी में 40 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। इसमें अस्थमा, एलर्जी और सांस के मरीजों की ज्यादा रहती है।
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. राकेश तिवारी ने कहा कि ठंड लगने पर अगर समय से इलाज न मिले तो निमोनिया होने की आशंका रहती है। सांस के मरीजों को इनहेलर साथ रखना चाहिए, इसका दुष्प्रभाव नहीं होता। ठंड में लापरवाही न बरतें, दिक्कत होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क कर इलाज कराएं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उपेंद्र सिंह के अनुसार शनिवार की रात को जिले का न्यूनतम तापमान सात डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं अधिकतम तापमान 22 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। मौसम में 60 प्रतिशत नमी दर्ज की गई। पांच किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलीं।
ऊनी पड़े पहनाकर करें बच्चों का बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ आफताब आलम ने कहा कि छोटे बच्चों का ठंड से बचाव करना बहुत जरूरी है। इस समय सर्दी जुकाम के अलावा निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। ठंड से बचाव के लिए नियमित गर्म कपड़े पहनाएं, कान को ढके रखें, सुबह शाम बाहर न खेलने जाने दें।