फोटो-14-गोंडा के आंबेडकर चौराहे के पास अतिक्रमण हटाते लोग। -संवाद
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गोंडा। सड़कों के किनारे अतिक्रमण हटाने की मुहिम में नजूल का जिन्न बाहर आ गया है। नगरपालिका प्रशासन ने शत्रु संपत्ति और वक्फ की भूमि पर अवैध कब्जों से आंखें फेर रखी हैं, लेकिन फ्री होल्ड और नक्शा स्वीकृति के बाद आंशिक भूमि भी नजूल की हो तो लाल निशान लगाने से नगरपालिका नहीं चूक रहा है। ऐसे में शहर के पांच हजार के करीब मकानों पर बुलडोजर चलना तय है। लोगों को हिदायत दी गई है। नजूल के बारे में कोई प्रक्रिया न होने की बात कही जा रही है, इसके बाद भी अतिक्रमण में सड़क के किनारे का मानक देखने के बजाए नजूल पर निगाहें नगरपालिका प्रशासन की टिकी हैं।
नजूल पर कब्जे के आधार पर फ्रीहोल्ड होता रहा है। साल 2013 से फ्रीहोल्ड होने में ढिलाई रही और 2020 में पूरी तरह पाबंदी हो गई। अभी तक नीति आने का इंतजार हो रहा है। गांवों में तो सार्वजनिक भूमि पर से कब्जों को हटवाया जा रहा है, लेकिन शहर में तरीका बदला है। यह अलग बात है गुरुनानक चौक पर शुरू किया गए अभियान मेें दूसरा मापदंड था। आंबेडकर चौराहे पर तो सड़क के किनारे छोड़ नजूल को खोज कर भी चिन्हित किया जा रहा है। शहर के अन्य नजूल पर मकानों पर संकट गहराता दिख रहा है। शहर में ही सरकारी भूमि पर कई बड़े कब्जे हैं। यहां तक की वन विभाग की ओर से लगाई गई एक वाटिका तक खत्म हो गई। दुकानदारों और व्यवसायियों पर बुलडोजर का दहशत दिख रहा है। माना जा रहा है कि नजूल के मामले में अब लोग बड़े स्तर पर जाने की तैयारी में हैं।
नजूल भूमि थी तो कैसे हुआ फ्रीहोल्ड व बना नक्शा
अतिक्रमण में जिस तरह कांपलेक्स में आंशिक भूमि नजूल का निकाला जा रहा है। उसके पूरे भवन का नक्शा सड़क से 60 फुट छोड़कर स्वीकृत किया गया है और सड़क के 55 फुट बाद से फ्रीहोल्ड किया गया था। अब अचानक नपाप आंशिक नजूल की भूमि होने की बात कहकर लाल निशान लगा रहा है। इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर फ्रीहोल्ड के समय और नक्शा के समय इस भूमि का ध्यान क्यों नहीं रखा गया है। इसमें कौन जिम्मेदार है, नपाप में कौन लोग हैं जिन्होंने उस समय फ्रीहोल्ड कराने वाले के साथ ही प्रशासनिक तंत्र को सही जानकारी नहीं दिया। कब्जा हटाने के साथ ही इन लोगों पर भी कार्रवाई करने की मांग लोग कर रहे हैं।
हिदायत के बाद खुद से ही लोग उजाड़ रहे अपनी दुकानें
प्रशासन की ओर से गठित टीम ने नापजोख के बाद हिदायत दी थी कि अतिक्रमण हटा लें। न हटाने पर बुलडोजर चलेगा। इससे लोग अपने से ही दुकानों को हटा रहे हैं। आंबेडकर चौराहे से क्रांति उपवन तक कई लोगों ने अपनी दुकानें हटाना शुरू कर दिया है। कई सालों से दुकान करने वाले अब अपनी ही दुकान को तोड़ रहे हैं। पहले प्रशासन से विनती की, लेकिन सुनवाई न होने पर अतिक्रमण में चिन्हित स्थानों को हटाने में जुटे हैं। यह अलग बात है कि उस पर कहीं कोई आगे चलकर कब्जा न करे, इसके लिए नजर बनाएं हैं। जिससे फ्रीहोल्ड नीति आने पर फिर प्रयास कर सकें।
अतिक्रमण के दायरे में आए लोगों को निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं। नजूल पर कब्जों के मामले में अभी एक साथ अभियान नहीं चलेगा। फिलहाल चरणबद्व तरीके से अभियान चलाया जा रहा है। संजय मिश्रा, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका गोंडा