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ठंड मे उभर कर आ रहा मांस पेशियों का पुराना दर्द,हृदयरोगी बढ़े

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गोंडा। ठंड बढ़ते ही मांसपेशियों से संबंधित जोड़ों के पुराने दर्द उभरने लगे हैं। जिला अस्पताल के हड्डी रोग की ओपीडी में हर रोज करीब 200-300 मरीज आते हैं। जिसमें 150 मरीजों में हड्डियों के पुराने दर्द, जोड़ों, घुटने, गर्दन का दर्द से लेकर नसों तक की समस्याएं होती हैं।
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डॉक्टर इन्हें ठंड से बचने व गर्म पानी से नहाने तथा सेंकाई करने का सुझाव देते हैं। वहीं हृदय से संबंधित बीमारियों के बीस से तीस मरीजों को सामान्य फिजीशियन से इलाज करवाकर वापस लौटना पड़ रहा है।
सोमवार को हड्डी रोग की ओपीडी में मरीजों का तांता लगा रहा। जिसमें अधिकांश मरीज जोड़ों, घुटने, गर्दन के दर्द से पीड़ित थे। आर्थोसर्जन डॉ. अरुण मिश्र ने बताया कि ठंड में पुराने जोड़ों के दर्द उभर कर आ जाते हैं।
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यहां ओपीडी में हर रोज करीब 200 से अधिक मरीज आते हैं, जिसमें 150 से अधिक लोगों में जोड़ो की समस्या होती है। उम्र बढ़ने के साथ कमजोर हुई हड्डियां इन समस्याओं को और बढ़ा देती हैं।
ठंड में कई बार जोड़ों का दर्द असहनीय हो जाता है। ऐसे में लोग कुछ एहतियात बरत कर और खानपान में परहेज कर काफी हद तक दर्द को नियंत्रित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में मांसपेशियों के सिकुड़ने की वजह से जोड़ों का दर्द बढ़ जाता है।
इसके अलावा जोड़ों को बांधकर रखने वाले लिगामेंट्स कमजोर होने और उनके लचीलेपन में कमी आने, जोड़ों में चिकनाई की कमी से उनके रगड़ने के कारण भी दर्द होता है। ऑर्थराइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस आदि से परेशान लोगों में इसकी समस्या ज्यादा होती है।
चिकित्सक के अनुसार हड्डियों के मरीजों खासकर बुजुर्गों को ठंड से बचने का प्रयास करना चाहिए। गर्म पानी से नहाने तथा सेंकाई करने से जोड़ो के दर्द में फायदा मिलता है।
दर्द से बचने के लिए विटामिन डी, कैल्शियम युक्त पौष्टिक आहार लेने के साथ पानी और मौसमी फलों का सेवन करें। हर दिन आधे घंटे व्यायाम जरूर करें, ताकि मांसपेशियां मजबूत रहें। मजबूत मांसपेशियां जोड़ों के दर्द से बचाती हैं। यदि धूम्रपान आदि करते हैं तो हड्डियां तेजी से कमजोर होती हैं।
ठंड बढ़ने से हृदय से संबधित बीमारियों में भी इजाफा हुआ है। हर रोज करीब तीस मरीज हृदय की बीमारियों से पीड़ित जिला अस्पताल आते हैं। लेकिन जिला अस्पताल के हृदयरोग विभाग विशेषज्ञ डॉक्टर न होने के कारण उन्हे प्रारंभिक इलाज कर रेफर कर दिया जाता है।
दो साल पहले हृदयरोग के विशेषज्ञ डॉ. जीके सिंह के सेवानिवृत होने के बाद किसी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई। जिससे जिला अस्पताल में आने वाले हृदय रोगियों को सामान्य फिजीशियन से इलाज करवाना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी से ही रेफर कर दिया जाता है। हृदय संबधी जांच के लिए आई टीएमटी व टूडी इको मशीनों का अता पता ही नहीं है।
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