गोंडा। सरकारी कार्यों में उदासीनता और लगातार खराब प्रदर्शन को गंभीर मानते हुए प्रदेश शासन ने बलरामपुर की पूर्व उपायुक्त स्वत: रोजगार मंजू त्रिवेदी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्हें प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर आरोप पत्र जारी किया गया है।
वर्ष 2022-23 में विद्युत सखी चयन से लेकर डे-एनआरएलएम बैंक क्रेडिट लिंकेज तक कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम निर्धारित प्रगति से पिछड़ गए थे। साल 2024-25 के जुलाई माह तक स्थिति और खराब हो गई। निर्धारित लक्ष्य 2,673 के मुकाबले केवल 125 समूहों का बैंक लिंकेज हो सका, जिससे जिले को प्रदेश में 75वां स्थान मिला। सितंबर माह में भी लक्ष्यपूर्ति बेहद कमजोर रही। क्रमिक लक्ष्य 793 समूहों के मुकाबले महज 260 समूहों का गठन ही कराया जा सका। आरोप है कि पूर्व उपायुक्त स्वत: रोजगार के पद पर तैनात मंजू त्रिवेदी द्वारा विभागीय व पर्यवेक्षणीय दायित्वों का निर्वहन न करने, कार्यक्रमों का नियमित अनुश्रवण और अधीनस्थों के कार्य की नियमित समीक्षा न करने के कारण यह स्थिति पैदा हुई। इस पर डीएम ने सभी तथ्यों का संज्ञान लेते हुए शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजते हुए विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की। शासन ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल प्रभाव से आरोप पत्र जारी करने का निर्णय लिया।
संयुक्त विकास आयुक्त राकेश कुमार पांडेय ने पुष्टि करते हुए बताया कि शासन के निर्देश पर बलरामपुर की पूर्व उपायुक्त स्वत: रोजगार मंजू त्रिवेदी को आरोप पत्र जारी किया गया है। जांच की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जल्द ही शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।