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कैश की किल्लत से सभी काम ठप

Fri, 11 Nov 2016 11:35 PM IST
अमर उजाला/गोंडा
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बैंंक में जुटी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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500 व 1000 के नोट बंद कर दिये जाने से कैश के किल्लत की समस्या पैदा हो गई है। हर कोई इस समस्याओं से जूझ रहा है। दूसरी ओर कैश की कमी से सरकारी व गैर सरकारी प्रोजेक्ट के काम में सुस्ती आ जाने के साथ ही लोगों के हर काम लगभग ठप पड़ गये हैं।
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लोगों के पास बड़े नोट न होने से उनके जरूरी काम नहीं हो पा रहे हैं। इसका असर बाजार पर भी साफ दिख रहा है। वहां सन्नाटा टूट नहीं रहा है। यही नही लोग अब सम्पत्तियों का क्रय विक्रय की रजिस्ट्री भी नही करवा पा रहे हैं। रजिस्ट्री ऑफिस में तीन चार से अधिक रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित किसानों का काम हो रहा है। पेश है समाज के 

रबी सीजन के लिए खेत तैयार करने से लेकर बीज व खाद इकट्ठा करने को लेकर किसानों को धन की अति आवश्यकता है। इस कीमती वक्त में पैसे की किल्लत से किसान हक्का-बक्का है। उसको पैसे की कमी से कुछ नहीं सूझ रहा है।
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इस समय किसान धान की फसल से खाली होने वाले खेेत की जोताई कराना चाह रहे हैं। इसके अलावा उन्हें कई तरह की फसलों के बीज और खाद की जरूरत है। खेती कराना आज के दौर में आसान नही रह गया है। इसमें बड़े रकम की जरूरत है।

कैश किल्लत के दौर में किसानों को कोई उधार भी नही दे रहा है। किसान जयराम, राम कुमार व खुशीराम ने बताया कि उनके पास पांच सौ का एक दो नोट है जो अब चल नही रहा है। छोटे नोट हैं नही है। बैंक से भी पैसा आसानी से मिल नही पा रहा है। जबकि छोटे किसानों के सामने और भी अधिक दिक्कत है। 

जिले में जो भी सरकारी व गैर सरकारी प्रोजेक्ट थे वह कैश किल्लत से कहीं ठप पड़ गये हैं तो कहीं मंद पड़ गये हैं। जिला महिला व पुरुष अस्पताल में निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन कैश किल्लत का असर यहां पर दिख रहा है।

मजदूरों को समय से मजदूरी व कांस्ट्रक्शन मैटेरियल का भुगतान न हो पाने काम धीमा पड़ गया है। इसके अलावा जो भी लोग निजी भवन बनवा रहे थे उनका काम बंद हो गया है। जिले में मौजूदा समय में आठ प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है। अलग-अलग संस्थाओं व फर्मों की ओर से कराया जा रहा है। इस बाबत एडीएम त्रिलोकीनाथ सिंह का कहना है कि कैश किल्लत से सरकारी व गैर सरकारी प्रोजेक्ट के काम पर असर पड़ा है। लेकिन यह चार-छह दिन में दोबारा पटरी पर आ जाएगा। 

भारी कैश किल्लत के चलते लोग सम्पत्तियों का बैनामा नहीं करा रहे हैं। दो दिन सम्पत्तियों के रजिस्ट्री का काम घट गया है। इसी रजिस्ट्री कार्यालय में जहां 25 से 30 रजिस्ट्री रोजाना हो रही थी वह घटकर तीन-चार रह गई है। गुरुवार को चार रजिस्ट्री हुई जबकि शुक्रवार को मात्र तीन रजिस्ट्री हो सकी।  
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