गोंडा। होली को रंगों के साथ ही तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों से जुड़ा पर्व माना जाता है। त्योहार पर गुझिया, पापड़ सहित अन्य खाद्य सामग्री का इस्तेमाल प्राय: हर घर में होता है। इसके चलते ही त्योहार करीब आने के साथ ही मोटी कमाई के लिए जनता की सेहत दांव पर लगाने वाले धंधेबाज मिलावटी खाद्य सामग्री खपाने में जुटे हैं। हालांकि इस पर रोकथाम के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम नमूनों की जांच से लेकर घटिया सामग्री की बिक्री रोकने की मुहिम में जुटी है।
अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक एफएसडीए द्वारा खाद्य सामग्री के 399 नमूने जांच के लिए एकत्रित कर लैब भेजे गए। इनमें से 300 नमूनों की जांच हो चुकी है। 164 नमूने घटिया गुणवत्ता के कारण फेल हुए हैं। इनमें दूध, दाल, तेल, खोवा, पनीर सहित अन्य खाद्य सामग्री शामिल है। होली को लेकर चलाए गए अभियान में भी अब तक 13 नमूने जांच के भेजे गए हैं।
एफएसडीए के अभिहीत अधिकारी अजीत मिश्र ने बताया कि नमूने फेल होने के बाद 154 दुकानदारों के खिलाफ एफएसडीए कोर्ट में वाद दाखिल कराया गया। सुनवाई के बाद दोषियों पर 22 लाख 15 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। उन्होंने चेताया कि होली पर रंगीन कचरी व मिठाई की बिक्री बिल्कुल न करें। ऐसा पाए जाने पर खाद्य सामग्री को नष्ट कराने के साथ ही बेचने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी। लाइसेंसी दुकान से ही खाद्य पदार्थों की खरीदारी करें।
मिलावटी खोवा खपाने को तैयार
होली में खोवा की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इसका फायदा उठाकर मिलावटखोर उबले हुए आलू व अरारोट या अन्य सस्ती वस्तु मिलाकर घटिया गुणवत्ता का खोवा तैयार कर इसे सस्ते दाम पर बेचते हैं। इससे बनी गुझिया खाने से सेहत बिगड़ जाती है। इसके साथ ही बेसन, तेल, पापड़, चिप्स, कचरी तक में मिलावट करके धंधेबाज मोटी कमाई करने में जुटे हैं।
मिलावटी सामग्री से लिवर पर सबसे ज्यादा असर
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निशांत पांडेय ने बताया कि मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन करने से सबसे ज्यादा नुकसान लिवर पर होता है। लिवर के संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। कई मामलों में किडनी भी प्रभावित हो जाती है। ऐसे में चाहिए कि जहां तक संभव हो ब्रांडेड या विश्वसनीय दुकान से ही सामान खरीदें और खुले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
मेडिकल कॉलेज में चर्म रोग विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. दीपक कुमार का कहना है कि होली में रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे केमिकल बर्न का खतरा होता है। आंख में चले जाने पर रोशनी तक जाने का खतरा रहता है। साथ ही स्किन एलर्जी भी हो सकती है। इससे बचने के लिए हर्बल नेचुरल कलर प्रयोग कर सकते हैं। घर से निकलने से पहले मास्चराइजिंग क्रीम का लेप लगाएं। होली खेलकर आएं तो पहले सादे पानी से रंग धोएं, फिर साबुन पानी से धोएं।